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(निशात कुरैशी) देवबन्द। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के एक फतवे में औरतों के रमजान माह की विशेष नमाज तरावीह की जमात करने और मस्जिद में तरावीह की नमाज पढऩे को गलत करार दिया गया है। मुफ्तियों ने तर्क दिया कि फर्ज नमाज के लिए औरतों को मस्जिद में जाने की इजाजत नहीं तो तरावीह के लिए उन्हें कैसे इजाजत हो सकती है।दारुल उलूम के इस फतवे का समर्थन देवबन्दी आलीम भी कर रहें है।
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पडोसी मुल्क पाकिस्तान से एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से लिखित में सवाल किया था कि विभिन्न स्थानों पर अलग अलग तरीकों से औरतों की तरावीह की नमाज हो रही है। एक स्थान पर हाफिज को इमाम बनाकर औरतों नमाज-ए-तरावीह पढ़ रही हैं। जबकि दूसरी तरफ नाबालिग (कम उम्र) के बच्चे को इमाम बनाकर तरावीह अदा की जा रही है। जबकि कुछेक स्थानों पर मस्जिदों में औरतों के लिए तरावीह का इंतजाम हो रहा है। इतना ही नहीं कई जगह ऐसी हैं जहां घर के अंदर हाफिज साहब तरावीह पढ़ा रहे हैं, जिनके पीछे मर्द नमाज अदा कर रहे हैं, जबकि उसी घर के दूसरे कमरे में पर्दे के साथ महिलाएं तरावीह पढ़ रही हैं। पूछा गया कि इनमें से किस तरीके से महिलाओं का तरावीह की नमाज पढना सही है। सवालों के जवाब में मुफ्तियों ने कहा कि महिलाओं को तरावीह की नमाज घर के भीतर एकांत में अदा करनी चाहिए। क्योंकि महिलाओं को फर्ज नमाजों के लिए भी मस्जिदों में जाने की इजाजत नहीं है। नाबालिग की इमामत दुरुस्त नहीं और न ही उसके पीछे नमाज होगी। इसके अलावा औरतों की तरावीह की नमाज अदा करने को पूछे गए सभी तरीके बिल्कुल मना है। सिर्फ घर के भीतर एकांत में तरावीह की नमाज अदा करने की इजाजत है। दारुल उलूम से जारी फतवा सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल किया जा रहा है।



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