हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। शिक्षाविद डॉ.जीशान अली रोजा और मेडिकल साइंस के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि मनुष्य के शरीर में मेदा एक कोमल अंग है, जिसकी अगर सुरक्षा न की जाए तो विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। रोजा मेदा के लिए एक उत्तम औषधि है।डॉक्टर जीशान अली बताते हैं कि क्योंकि जब एक मशीन लगातार चलती है और उसे बंद ना किया जाए तो वह किसी भी समय खराब हो जाएगी। उसी प्रकार मेदे को यदि खानपान में विश्राम ना दिया जाए तो उसकी भी स्तिथि बिगड़ जाती है। उनका कहना है कि रोजा रखने से आंते दुरुस्त वह मेदा साफ और शुद्ध रहता है। पेट जब खाली होता है तो जहरीले कीटाणु या पेट के कीड़े मर जाते हैं।रोजा इंसान के वजन को कम करता है, पेट की चर्बी को खत्म करता है, ब्लड प्रेशर, गुर्दे का दर्द, स्मरण की शक्ति कमी आदि के लिए अचूक वीण है। रोजा जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए सबसे उत्तम औषधि है। शर्त है 4 सप्ताह की और यही इस्लामी रोजे की अवधि है। इस्लामिक शिक्षाओं का अध्ययन करने पर जब मैं रोजे के विषय पर पहुंचा तो मालूम पड़ा कि इस्लाम ने अपने अनुयायियों को इतना महान फार्मूला दिया है, यदि इस्लाम अपने अनुयायियों को कुछ ना देता तो रोजे का फार्मूला उसी के लिए काफी था। तात्पर्य यह है कि रोजा एक इबादत होने के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम भी है।
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