हरिद्वार की गूंज (24*7)
(निशात कुरैशी) देवबंद। माह-ए-रमजान के तीसरेंजुमा की नमाज मगफिरत और गुनाहों की तलाफी की दुआ के साथ संपंन हुई। देहात और नगर के रोजेदारों ने प्रमुख मस्जिदों में नमाज-ए-जुमा अदा रहमत की बारिश और आपसी सौहार्द को दुआएं की। तो उलेमा ने रोजेदारों से जरुरतमंद लोगों को ईद की खुशियों में शामिल करने के लिए उनकी ज्यादा से ज्यादा इमदाद करने का आह्वान किया। इस दौरान बाजारों में शाम तक रोज़ेदारों ने इफ्तार और सहरी के सामान के साथ-साथ ईद की तैय्यारियों को खरीदारी की। रमजान के तीसरें जुमा की नमाज में उलेमा-ए-कराम ने मुल्क में अमन-ओ-अमान और गुनाहों की तौबा एवं गर्मी से बचाव को रहमत की बारिश को दुआं कराई। नगर की प्रमुख मस्जिद, मरकजी जामा मस्जिद में नमाज-ए-जुमा अदा कराने के बाद मुफ्ती मोहम्मद आरिफ कासमी ने आह्वान किया कि अल्लाह और उसके रसूल के साथ मोहब्बत रखना हो तो गुनाहों को छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रमजान माह में अल्लाह रब्बुल इज्जत स्वंय रोजेदारों की इबादतों का सवाब अता करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमने अपने गुनाहों को छोड़ने की आदत नहीं डाली तो हमारे गुनाह हमारी मेहनतों से की गई इबादतों को चट कर जाएंगे।  मस्जिद-ए-रशीदिया में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दीन-ओ-इमान पर अमल करने की हिदायत की। उन्होंने कहा कि अपने आप को गुनाहों से बचाओ और मेहनत और हलाल की कमाई करने वालो की ही अल्लाह रब्बुल इज्जत इबादत कबुल करते हैं। मदनी ने कहा कि माह-ए-रमजान में ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह का जिक्र में बिताना चाहिए। और उन्होंने जुमा की फजीलत बयां करते हुए कहा कि इस दिन अल्लाह के रसूल पर ज्यादा से ज्यादा दरुद भेजनी चाहिए। बयान से पूर्व मुफ्ती कारी अफ्फान मंसूरपुरी ने नमाज-ए-जुमा अदा कराई। आदीनी मस्जिद में वक्फ दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद कारी वासिफ उस्मानी, दारुल उलूम की कदीम मस्जिद, छत्ता मस्जिद, काजी मस्जिद, मोहल्ला पठानपुरा की जामा मस्जिद, मोहल्ला किला की जामा मस्जिद समेत नगर की अन्य प्रमुख मस्जिदों में पेश-इमाम ने नमाज-ए-जुमा अदा कराई। देहात की जामा मस्जिदों में नमाज-ए-जुमा अदा होने के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीणो ने देवबंद पहुंच नमाज-ए-जुमा अदा की। 
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