हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। जी हाँ हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के जाने माने समाज सेविका पूनम भगत की। 2004 में लोकसभा चुनाव का समय रहा हो या फिर 2009 में पुनः एक बार फिर केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बननी हो, उत्तराखंड में जब जब राज्य सभा के चुनाव के दौरान केंद्रीय कांग्रेस कमेटी की ओर से पूनम भगत को जो भी जिम्मेदारी मिली उसे अपने चिर परिचित अंदाज हस्ते/ हँसाते मिलते मिलाते में बेखूबी कार्यभार  सम्भालते हुवे सफलता प्राप्त कर अपने केंद्रीय कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की वाह वाह लूटी। विपक्ष दलों के आला नेताओ ने उन्हें समय समय पर विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर उन्हें कांग्रेस पार्टी से अपने दल में लाने की भरपूर प्रयास होते रहे, मगर खानदानी कांग्रेसी होने के कारण पूनम ने कांग्रेस में रहकर ही हरिद्वार वासीयो ही नही अपितु उत्तराखंड और देश के जिस स्थान से भी उन्हें सेवा करने का अवसर मिला वो तुरन्त ही तन मन धन से समर्पित होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में जुट जाती थी। बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा करना तो जैसे उनके खून में हो। अपने जीवनकाल में पूनम ने काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। एक तरफ अपने बच्चों की परवरिश तो दूसरी ओर कांग्रेस की एक सच्ची सिपाही बनकर जनता की सेवा में तत्पर रहना किसी तपस्या से कम नही रहा। हरिद्वार , देहरादून और उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी की ओर से हर विकट परिस्तिथि में सेवा लेते रहे मगर उन्हें इनकी सेवा के बदले आज तक कभी अच्छे पद पर रहकर पूनम को सेवा करने का अवसर नही दिया गया। जो कांग्रेस के खुद को वरिष्ठ नेता समझते है वो पूनम के सामने तो खुद को हिमायती साबित करने का प्रयास करते रहे मगर टिकट मिलने के समय ये ही पूनम के विरोधी गुट में खड़े नजर आते रहे। इन सब परिस्तिथि में भी पूनम भगत का हौसला कभी कम नही हुवा, आज भी उनके ह्रदय में हरिद्वार के लिए बहुत कुछ कर गुजरने की आग जल रही है। उनका मानना है कि बीच मे कुछ विपक्ष की पार्टीयो ने जो जनता को कांग्रेस के प्रति गुमराह करने की कोशिश की है उसे अपने सेवाओ के बल पर जनता का कांग्रेस के प्रति प्यार और विश्वास लौटना उद्देश्य प्राथमिकता में है। यदि कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी उन्हें हरिद्वार में मेयर पद पर चुनाव लड़ने का अवसर देते हैं तो वो जनता के विश्वास को जीतने और उस पर खरा उतरने में कोई कमी नही आने देगी। अक्सर प्रत्येक चुनाव में देखा गया है कि वोटर और पार्टी कार्यकर्ताओ को चुनाव जीतने तक ही महत्व दिया जाता है मगर पूनम भगत के पास वो योजनाये अभी से तैयार है जिनमें वोटर और कार्यकर्ताओं को कभी साहब मीटिंग में है तो कभी साहब बाहर गए जैसे बहानो से निराश किया जाता है। प्रत्येक वोटर या कार्यकर्ता फिर चाहे वो किसी भी जाति या धर्म का हो उसकी शिकायत और सुझावों के आधार पर ही शहर का विकास किया जायेगा। अभी तक पूनम अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की राजनीति का शिकार होने के कारण उन्हें जनता की सेवा करने के लिए अब तक टिकट नही मिल पाया है मगर इस बार आशा हैं कि  केंद्रीय नेर्तत्व उनकी सेवा भाव और योग्यता को नजरअंदाज नही करेगा।
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