हरिद्वार की गूंज (24*7)
 |
|
(गगन शर्मा) हरिद्वार। भारत एक कृषि प्रधान देश है। केंद्र स्तर पर किसानों के हित मे समय समय पर योजनाये भी आती है। मगर भारत देश का कोई भी राज्य या जनपद तब तक किसानो की यथासम्भव मदद नही कर पायेगा जब तक उनके जिम्मेदार अधिकारियों में आपसी तालमेल नही होगा। ताजा मामला हरिद्वार जनपद के ब्लॉक बहदराबाद का है जहां के धान क्रय केंद्रों पर किसानों से उनके धान लेने की समुचित प्रक्रिया अभी तक प्रारम्भ नही हुई है। किसानों का कहना है कि हरिद्वार जनपद में प्रशासन के पास किसानों से धान लेकर रखने के लिये गोदाम न होने के कारण ये अव्यवस्था फैली हुई है। जिसके चलते प्रशासन को धान लेकर निकटवर्ती धान कुटाई केंद्रों को बेचना पड़ता है। उन धान कुटाई केंद्रों से अभी तक जिला प्रशासन का टॉमेलन बैठने के कारण प्रशासन किसानों से धान नही ले रहा है। इसके कारण किसानो को खेत से धान काटने देरी हो रही है। कटारपुर निवासी किसान नूतन कुमार का कहना है कि समय से धान न कटने के कारण उन्हें देर रात तक खेत मे पहरा देना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान अपने धान को अन्य राज्य जैसे हरियाणा जाकर बेचने जा रहा है तो दूसरे राज्य के किसान बॉर्डर पर ही उन्हें रोक रहे हैं। जिला प्रशासन और उनके जिम्मेदार अधिकारियों के कारण हरिद्वार के किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। एक अन्य किसान का कहना है कि यदि प्रशासन उन्हें गन्ने की तरह धान लेकर पर्ची देने की व्यवस्था भी कर दे तो भी किसान समय से अपने धान काटकर खेत को खाली करके दूसरी फसल बोने की तैयारी कर सकता है। ब्लॉक बहदराबाद से धान क्रय केंद्र के प्रभारी बीर सिंह का किसानों से कहना है कि उनकी समस्या का बहुत जल्द निवारण होने वाला है। जल्दी ही सभी धान क्रय केंद्रों पर किसानों से धान खरीदने की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे किसान आंदोलन को रोकने हेतु राज्य सरकार और केंद्र सरकार को चाहिए कि वो उन जिम्मेदार अधिकारियों की समस्याओं को सुने। ताकि किसानों को अपनी समस्याओं के निवारण हेतु ऐसे आंदोलन का सहारा न लेना पड़े।
Post A Comment:
0 comments so far,add yours