हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। कल सोमवार को 25 अक्टूबर को प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए हरिद्वार से मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सचिव महंत रविंद्र पुरी महाराज और पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरी महाराज के नेतृत्व में साधु संतों का एक बड़ा जत्था आज रवाना हुआ। मनसा देवी मंदिर, आनंद भैरव मंदिर और माया देवी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद साधु संतों का यह दल प्रयागराज के लिए रवाना हुआ साधु-संतों में बहुत उत्साह था। प्रयागराज रवाना होने से पहले महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की प्रयागराज की बैठक संवैधानिक और न्यायोचित है इससे पहले अखाड़ा परिषद के कथित नाम पर जिन संतों ने हरिद्वार में बैठक की थी वह गैर संवैधानिक है क्योंकि उस बैठक का एजेंडा समय रहते जारी नहीं किया और ना ही उसी कोई विधिवत सूचना दी गई और ना ही महामंत्री से बैठक के बारे में कोई भी विचार विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की बैठक के बारे में विधिवत रूप से समय रहते अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने एजेंडा जारी किया था कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थों के लिए अखाड़ा परिषद को बदनाम करने के लिए एक गैर कानूनी बैठक बुलाई थी जिसका कोई औचित्य नहीं है उन्होंने कहा कि बैठक का असली औचित्य प्रयागराज की बैठक में हो रही अखाड़ा परिषद की बैठक का है जिसमें अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद कि प्रयागराज में हो रही बैठक में परिषद को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा और संतों-महंतों की गरिमा और मर्यादाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि सनातन धर्म की परंपराओं को और सुदृढ़ किया जा सके। आत्मविश्वास से लबालब भरे श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि हमारा दायित्व अखाड़ा परिषद की गरिमा को बढ़ाने का है जिसे हम पूरा करेंगे, पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरी महराज ने कहा कि प्रयागराज की बैठक का ही औचित्य है हरिद्वार में पिछले दिनों कुछ लोगों ने जो बैठक की थी उसका कोई औचित्य नहीं है प्रयागराज बैठक में रवाना होने के लिए हरिद्वार से श्री महंत रविंद्र पुरी, महंत प्रेम गिरि ,महंत शैलेंद्र गिरी महंत ओंकार गिरी समेत बड़ी तादाद में संत रवाना हुए।
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