हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल कनखल के कोठारी संत जसविंदर सिंह देश प्रदेश वासियों को गुरु पूर्णिमा की बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने गुरु पूर्णिमा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा स्मरण और समर्पण का महापर्व है इस दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति सच्चे मन से समर्पणा करता है और गुरु के आदेशों का स्मरण पूर्वक पालन करता है। उन्होंने कहा कि गुरु मानव जीवन का समाधान है जिसके भी जीवन में कोई उलझन हो तो उसे गुरु की शरण में जाना चाहिए। अहंकार का परित्याग करके शरणागत होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में हर मानव को अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहकर बेहतर समाज के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए। समाज में समर्पण भाव से कार्य करने से कार्य की पूर्ति अवश्य होती है और मानव का जीवन प्रसन्नता से भर जाता है। प्रसन्नता भगवान का ही पर्यायवाची है जिसे गुरू कृपा से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गुरु सह वेदों के रचयिता महर्षि वेद-व्यास का अवतरण आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। उन्होंने सभी पुराणों की भी रचना की है। इसलिए इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रुप में मनाते हैं। और इस दिन सभी अपने-अपने गुरु की पूजा करते हैैं। उन्होंने बताया कि शिवपुराण के अनुसार अठ्ठाईसवें द्वापर में इसी दिन भगवान विष्णु के अंशावतार वेदव्यास जी का जन्म हुआ। चारों वेदों का बृहद वर्णन करने और वेदों का सार 'ब्रह्मसूत्र' की रचना करने के फलस्वरूप ही ये 'महर्षि व्यास' नाम से विख्यात हुए। इन्होंने महाभारत सहित अट्ठारह पुराणों एवं अन्य ग्रन्थों की भी रचना की, जिनमें श्रीमदभागवतमहापुराण जैसा अतुलनीय ग्रंथ भी है। इस दिन जगतगुरु वेदव्यास सहित अन्य गुरुओं की भी पूजा की जाती है। शैक्षिक ज्ञान, आध्यात्म एवं साधना का विस्तार करने और इसे प्रत्येक प्राणी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सृष्टि के आरम्भ से ही गुरु-शिष्य परंपरा का जन्म हुआ।
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