हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड प्रदेश में बढ़ते कोरोना माहवारी की वजह से चारों धाम यात्रा स्थगित कर दी गई जिस कारण से उत्तराखंड प्रदेश में ऑटो चालक, टैक्सी चालक, होटल व्यवसाय सभी भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। सभी दुकानदारों के कार्य चौपट हो गए हैं जिस वजह से इन लोगों को अपने परिवार का लालन पालन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जिन वाहन चालकों, और अन्य व्यापारियों को बैंक लोन की किस्तें देनी है उन पर इस लोक डाउन की दोहरी मार पड़ रही है। उत्तराखंड के दुकानदारों और व्यापारियों का कहना है कि जिस प्रकार दिल्ली में केजरीवाल की सरकार ने वहाँ के ऑटो चालकों और टैक्सी चालकों को आर्थिक पैकेज देने का ऐलान किया है। उसी प्रकार उत्तराखंड सरकार को भी कोई ऐसी घोषणा करनी चाहिए। होटल व्यवसायी सन्दीप अरोड़ा ने कहा कि जब हालात सामान्य रहते हैं तो सरकार उनसे विभिन्न प्रकार का टेक्स भी तो कमाती है जब व्यापारियों पर आज संकट आया है तो ऐसे में जितने भी हमारे होटल के व्यवसाय करने वाले लोग हैं उनके बिजली के बिल, टैक्स माफ किया जाए।अनुज चौहान का कहना है कि चुनाव के अलावा भी समय समय पर नेताओ को प्रदेश की जनता हेतु बिजली के बिल में राहत देनी चाहिए। ग्राम प्रधान नूतन कुमार के अनुसार गरीब मजदूरों के लिए पूरे प्रदेश में जनता की आवश्यकता के अनुसार 2 माह का राशन फ्री किया जाए भले ही उसका राशन कार्ड कैसा भी हो। क्योंकि पिछले वर्ष 2020 में बहुत से राशन डीलर ने राशन के मामले में काफी भ्रष्टाचार किया था। राज्य सरकार को चाहिए जिस व्यक्ति के पास में राशन कार्ड है और वह किसी भी योजना का है उसे 2 माह का राशन निःशुल्क दिया जाए। साथ में किसान हित में राज्य सरकार को सोचना चाहिए की हरियाणा सरकार की तर्ज पर जिन किसानों के पास में बिजली के टुबेल हैं उनको भी बिजली मुक्त देने की घोषणा करनी चाहिए। क्योंकि उत्तराखंड प्रदेश में ही सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन होता है लेकिन यहां की सरकार बिजली के दामों में निरंतर बढ़ोतरी कर रही है। अम्बुवाला निवासी अरुण शर्मा का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है जो राज्य उत्तराखंड सरकार से बिजली खरीद रहे हैं वह लोग तो अपने प्रदेश में बिजली के दाम नहीं बढ़ा रहे हैं, और लोगों को बहुत अच्छी सुविधाएं दे रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि उत्तराखंड प्रदेश में बिजली का उत्पादन होता है और यहां की सरकार प्रतिवर्ष बिजली की दरें बढ़ा देती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उत्तराखंड प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली के बिल 2 माह के आते हैं जो कि सरासर गलत है बिजली का बिल प्रतिमाह उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए ताकि उपभोक्ता उस बिल को समय से जमा कराने में सक्षम रहें। 2 माह का बिल अधिक होने की वजह से ग्रामीण इलाके के व्यक्ति उसे जमा कराने में असमर्थ रहते हैं क्योंकि ग्रामीण इलाकों में किसान और मजदूर निवास करते हैं किसान के पास 6 माह के बाद आय के स्रोत बनते हैं। 6 माह तक किसान को अपने पास से ही खेती में पैसा खर्च करना होता है। मजदूरों की भी यही दशा है इसीलिए प्रदेश की सरकार को भी दिल्ली सरकार और हरियाणा सरकार की भांति जनता के कल्याण हेतु आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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