हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जहां कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने अपना कहर बरसा रखा है। और देश में चारों ओर ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मची है तो वही ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला हरिद्वार जिले के ईमली खेड़ा पुलिस चौकी क्षेत्र स्थित मां गंगा गैस कंपनी का है। जहां ऑक्सीजन लेने आए मरीजों के परिजनों ने कंपनी प्रबंधन पर ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने के गंभीर आरोप लगाएं हैं। वही बीमार व्यक्ति के परिजन सुहैल का कहना है कि डाक्यूमेंट्स जमा करने और कंपनी के गेट पर कई कई घंटे खड़े होने के बाद भी कंपनी प्रबंधन ऑक्सीजन देने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहां कि कंपनी प्रबंधन ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों लोगों के साथ सांठगांठ कर ऑक्सीजन सिलेंडर गाड़ियों में लोड कर, दूसरे राज्यों में पहुंचा रहा है। और स्थानीय जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन की मांग करने पर कंपनी प्रबंधन गाली गलौज और अभद्रता पर उतारू है। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने कोई भी आश्वासन ऑक्सीजन देने का नहीं दिया है। और बार-बार मांग करने पर भी अपनी हठधर्मिता और दबंगई दिखाने पर उतारू है। उन्होंने बताया कि फ्री ऑक्सीजन के नाम पर कंपनी प्रबंधन पैसे भी वसूल रहा है। वही नोएडा से ऑक्सीजन लेने आए अखलाक ने बताया कि हमारे परिवार के 1 सदस्यों को कोविड-19 की वजह से ऑक्सीजन की आवश्यकता थी और हम सुबह लगभग 4 बजे से कंपनी के गेट पर खड़े हैं और आधा दिन जाने के बाद भी हमें कंपनी प्रबंधन ने ऑक्सीजन नहीं दिया। बार-बार खुशामद करने के बाद भी कंपनी प्रबंधन ने एक ना सुनी। और ऑक्सीजन न मिलने के कारण कई घंटों से तड़प रहे हमारे मरीज की मौत हो चुकी है। उन्होंने शासन प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि शासन प्रशासन से ऐसे गैर जिम्मेदारन कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करें, जो मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों को पीड़ित करता हो। वहीं अगर बात हरिद्वार जिलाधिकारी के आदेशों की कि जाए तो जिलाधिकारी के आदेश अनुसार मरीज के डॉक्यूमेंट जमा कर किसी भी ऑक्सीजन कंपनी से जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन ले सकते हैं। लेकिन मां गंगा गैस कंपनी प्रबंधन जिलाधिकारी के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। कंपनी प्रबंधन द्वारा रोते बिल बिलाते हुए मरीजों के परिजनों की नम आंखें तक नहीं दिखी। जहां महामारी कोरोना वायरस से आई विपदा से सैकड़ों की संख्या में मौत हो चुकी है और मौतों का सिलसिला जारी है और सर्व समाज एक दूसरे के साथ दुख बांटने के लिए खड़ा है तो वही ऐसे समय में कंपनी प्रबंधन द्वारा क्रूरता और लोभी व्यवहार बड़े दुर्भाग्य की बात है। अगर इस प्रकरण में मौके पर पहुंचे इमली खेड़ा चौकी इंचार्ज की बात की जाए, तो वह भी कंपनी प्रबंधन का पक्ष करते हुए नजर आए, उन्हें भी रोते बिल बिलाते तड़पते परिजनों का दर्द महसूस नहीं हुआ और सूचना पर न्यूज़ को कवर करने पहुंचे पत्रकारों की ही वीडियो कवर करने के आदेश अपनी पुलिस टीम को दे दिया, जैसे कि मीडिया कोई न्यूज़ कवर ना कर, अपराध कर रही हो। ऐसे पुलिस कर्मियों की सोच और व्यवहार के कारण ही पूरे विभाग की छवि धुल मील होती है। जो अपने कर्तव्य और फ्रिज के प्रति गंभीर ना होगा प्रताड़ित करने वाले व्यक्तियों का गुणगान गुनगुनाते हैं। उच्च अधिकारियों को इस ओर भी गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है।



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