हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(फिरोज अहमद) लेख। हमारे देश में विभिन त्यौहार मनाये जाते हैं। इन सभी त्योहारों का अपना अपना महत्व होता हैं। उसी तरह से रमजान यह इस्लाम धर्म का सबसे प्रसिद्ध त्यौहार के रूप मे माना जाता हैं। रमज़ान का महीना हर मुस्लमान के लिए पावन और महत्वपूर्ण होता है। मुसलमानों के बारह महीनों में एक महीने का नाम रमजान है। इस महीने में हर मुसलमान अपने दिल से रोजे रखते है। रमज़ान का महीना 30 दिनों के लिए आता है। रमज़ान के महीने को तीन भागो में विभाजित किया गया है। जो प्रथम, द्वितीय और तृतीया भागो को इस्लामिक भाषा में अशरा कहा जाता है। पहला अशरा 10 दिन का होता है, दूसरा अशरा 11से 20 में और तीसरे दिन 21-30 में विभाजित किया गया है। पहला अशरा रहमत का जिसमे अल्लाह की कृपा होती है। दूसरे अशरे में मगफिरत की होती है, जिसमे अल्लाह हर मुस्लमान के गुनाहों को माफ़ करता है। तीसरे अशरे में जहनुम की पीड़ा से खुद को बचा सकते है। रमज़ान के पहले दस दिन अत्यंत ज़रूरी होते है। इन रहमत के दिनों में हर मुस्लमान गरीबो और जरुरतमंदो की सहायता करता है। हर एक इंसान इन दिनों में विनम्रता पूर्वक बातचीत करता है। सभी की इज़्ज़त करता है और सदव्यवहार से सबके मन जीतने का काम करता है। रमज़ान के दूसरे अशरा तोबा तिल्ला और माफ़ी का होता है। कहते है इस अशरे में अल्लाह दूसरे दिनों के मुकाबले इस वक़्त अपने बन्दों को जल्द माफ़ कर देता है। इस्लामिक रीति रिवाज़ के अनुसार यहाँ लोगों को अपने किये हुए पापों से मुक्ति मिल जाती है। तीसरा अशरा जहनुम से खुद को मुक्त करना होता है। यहाँ लोग अल्लाह से इबादत करते है की उन्हें जहनुम से बक्श दे। इस अशरे में 10 दिनों तक लोग एक ही जगह बैठकर अल्लाह को पुकारते है। रमज़ाने पाक का महीना हर मुसलमान के लिए दुआओं का और खुशियों का महीना होता है। रमज़ान के महीनों में इंसानों को बहुत कुछ सिखने को मिलता है। लोग अपनी रोज़मर्रा के कामों को करते हुए अल्लाह की इबादत करना भूल जाते हैं, समय नहीं निकाल पाते हैं। रमज़ान का महिना अल्लाह के बंदो को ये याद दिलाता है की ये ज़िन्दगी उस खुदा की नेमत है, कुछ समय उसकी इबादत के लिए भी निकाल लें ताकि खुदा का रहम हम सभी इंसानों पर बना रहे। और हम सब खुशाली जिंदगी जियें। रमजान का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है। और रमजान को पुरे विश्व में मानते है। इस्लामिक धर्म के मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है की 610 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद साहब के जरिये पवित्र किताब कुरान शरीफ जमीन पर आयी। कहते हैं की तभी से दुनियाभर के मुसलमान पहली बार कुरान उतरने की याद में पूरे महीने रोज़े रखें है। लिहाजा रमजान को कुरान के जश्न का भी मौका माना जाता है। क्योकि पूरे रमजान में मुसलमान कुरान की तिलावत यानि कुरान को पढ़ते है। इस्लाम धर्म में रोजा, अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का त्यौहार भी माना जाता है। रमज़ान के महीने में हर मुसलमान अपने अल्लाह की इबादत यानी प्रार्थना करते है। रोजें के दिन हर मुसलमान पांच दफा नमाज़ अदा करते है। रमज़ान के महीने में सुबह होने से पूर्व और अज़ान से पहले भोजन ग्रहण करते है। किसको शहरी भी कहते है भोजन करने के बाद नमाज़ अदा करते है। उसके बाद मे सारा दिन उपवास रखते है और ज़्यादातर वक़्त अल्लाह से दुआ मांगते है। शाम होने के बाद अपना रोज़ा खोलते है। रोजा खोलने को रोजा इफ्तार कहा जाता है। इस वक़्त वह जो भी भोजन और पकवान बनाते है उन्हें दूसरे परिवारों और ज़रूरत मंदो को भी परोसते है। रमज़ान के दिनों में हर एक नैक बन्दा पूरा दिन खुदा की दुआ में लगा देते है और नेक काम करने में विशवास रखते है। ईद के दिन बच्चे -बूढ़े साथ में ईद मनाते है और बच्चों को ईदी दी जाती है। ईद के दिन स्वादिष्ट सेवइयां बनती है। ईदगाह में नमाज़ अदा करने के बाद खुश होकर अपने घरों की तरफ लौटते है। ईद के दिन बाज़ारो में बड़ी रौनक रहती है। ईद का त्यौहार कई दिनों तक मनाया जाता है। लोग अपने हर रिश्तेदारों के घरों में जाकर ईद की डेढ़ सारी बधाई और शुभकामनाएँ देते है। ईद के दिन मुस्लिम परिवारों के आलावा अन्य धर्म के लोग भी ईद के त्यौहार में शामिल होते है और ईद की मुबारक बात देते है। ईद का त्योहार सभी भारतीयों को एक साथ मिलजुल कर प्रेम और आस्था के साथ जीवन यापन करना सिखाता है।
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