हरिद्वार की गूंज (24*7)
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चारो ओर महामारी है।
किसका है यह पाप अधम
जीवन ज्यों हुआ अशुभकारी है।
चारो ओर महामारी है।
देखो सब पैगंबर चुप हैं।
एक वायरस घूम रहा है।
फैल रहा है महासंक्रमण
जिस जिसको यह चूम रहा है।
अभी पराजित नहीं समर में
युद्ध अभी इससे जारी है।
चारो ओर महामारी है।
कैसा खौफ़नाक मंजर है
गलियां सूनी सड़कें सूनी
रमे हुए हैं अपने ही घर
खुद ही खुद सब लगाके धूनी
दूकानों पर माल नदारद
कैसी तो यह लाचारी है।
चारो ओर महामारी है।
किस प्रयोगशाला से निकले
ये कद्दावर जैव वायरस
चूस रहे हैं इंसानों का
अब तक का संचित जीवनरस
मास्क पहन कर घूम रहे यम
देखो किस-किस की बारी है।
चारो ओर महामारी है।
अस्त्र शस्त्र के बिना निरंतर
जारी अब यह विश्वयुद्ध है।
जो वरदान हुआ करता था
अब वह ही विज्ञान क्रुद्ध है।
कर लो जो बचाव संभव है
इसकी मुद्रा संहारी है।
चारो ओर महामारी है।



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