हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन इस समय जोर शोर से चल रहा है। जिसके लिये केन्द्र सरकार से करोड़ो रूपये का उत्तराखंड सरकार को बजट दिया गया था। मगर मेले प्रशासन के उच्च अधिकारियों का समाज की जिम्मेदार मीडिया से तालमेल के अभाव से हरिद्वार में अव्यवस्था कम होने का नाम नही ले रही है। अधिकारियों की कर्मचारी सुनने को तैयार नही या अधिकारी ही अव्यवस्था को नियंत्रित करने में गम्भीर नही इसका पता तो तब चले जब मेले प्रशासन द्वारा अपना कोई मीडिया प्रभारी बनाया हुवा हो। अधिकारियों द्वारा जब मीडियाकर्मियों के फोन नहीं उठाये जाते हो तो सोचो जनता की समस्याओं हेतु उनके फोन क्या उठाते होंगे! यही कारण है कि पिछले कई महीने बीत गए मगर कुंभ नगरी हरिद्वार में कूड़ा करकट, खुले में शौच, यहाँ तक कि हर की पौड़ी पर भी सफाई व्यवस्था खराब है। हर की पौड़ी पर चाहिए कि वहां की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी किसी की तय हो। कनखल के लाटोवाली और दक्ष मंदिर के बाहर बदबूदार कूड़े के ढेर अव्यवस्था की गवाही दे रहे हैं। शंकर आश्रम मेटाडोर स्टैंड, रानीपुर मोड़ (चंद्राचार्य चौक) और देशरक्षक तिराहे पर आम जनता के लिये कोई शौच की व्यवस्था का न होना बता रहा है कि कुंभ मेले के अधिकारी मीटिंग में व्यस्त तो रहते हैं मगर उन मीटिंग का लाभ जनता औऱ कुम्भ मेले में आ रहे श्रद्धालुओं तक नही पहुँच रहा है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने एक पत्रकार से कहा था कि हम हर जगह नही जा सकते मगर यदि समाज और जनता के हित मे पत्रकारिता करने वाले पत्रकार समय समय पर राज्य सरकार और विभिन्न जनपदों के आला अधिकारियों को सूचित करते रहे तो हमारा राज्य देश मे अव्वल आ सकता है। परिणाम पूरे भारत देश के सामने है। मगर हरिद्वार के वो अधिकारी जो अहंकार या अन्य कारणों से फोन उठाना गैर जरूरी समझते हो वो कैसे अपनी जिम्मेदारियों को सही प्रकार से पूर्ण कर पायेंगे।

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