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अक्सर महिला भारत में ही कुपोषण की शिकार क्यों पाई जाती है? एक चिंतन
वर्तमान परिवेश में महिला कितनी आजाद है व भारतीय राजनीति में आने के बाद क्या आजाद हो पाई। वर्तमान में फुले शाहू आंबेडकर आंदोलन में बहुजन महिलाओं की स्थिति पर एक चिंतन आदि विषयों पर दूर-दराज से आई महिलाओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने त्यागमूर्ति माता रमाबाई के चरित्र पर अपने अपने विचार रखें उन्होंने कहा कि माता रमाबाई से बढ़कर त्याग और बलिदान इस देश की महिलाओं के लिए किसी ने नहीं किया उन्होंने अपने पति डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की शिक्षा के लिए अपने सभी बच्चे कुर्बान कर दी है और अपने पति को एक बार भी सामाजिक कार्य करने से नहीं रोका आज सभी महिलाओं को माता रमाबाई का आभार प्रकट करना चाहिए। वह उनके चरित्र चित्रण को अपने जीवन में उतार कर त्याग और बलिदान की मिसाल पेश करनी चाहिए। हरिद्वार से नीतू सिंह ने कोरोना कॉल में स्वयं की परवाह किये बगैर भेल हरिद्वार के मुख्य अस्पताल मे कोरोना योद्धा बनकर सेवा दी थी। सामाजिक कार्यो और जनसेवा में आगे बढ़कर कार्य करना नीतू सिंह को पशनद हैं।इस अवसर पर डॉक्टर राधा वाल्मीकि, नीलम बौद्ध, प्रोफेसर चंद्रकांता माथुर दिल्ली, किरण प्रभा आगरा, सैफाली बौद्ध ओरैया, चित्रा बौध्द आगरा, डॉक्टर सीमा सिंह आगरा, सुमन बौद्ध फिरोजाबाद, नीतू सिंह हरिद्वार, बालेश सिंह हरिद्वार, उषा चन्द्रा सहारनपुर, गीता सिद्धार्थ ग्वालियर, वैजन्ती माला झबरेड़ा, मीरावती गौतम मुरादाबाद, मधु बौद्ध अलीगढ़, मंजू गौतम दिल्ली, मिथिलेश गौतम दिल्ली, संयोगिता सहारनपुर, डा पुनम बेदी हरियाणा, अंजना वाल्मीकि हरियाणा, ईन्दू गौतम सहारनपुर, सविता कांगड़ा हरियाणा, डॉ गायत्री सहगल सहारनपुर, प्रोफेसर मलका अख्तर सहारनपुर, ममता चौधरी सहारनपुर, शिखा बेेैनीवाल सहारनपुर, व मनीषा तंवर हरियाणा से उपस्थित रही।



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