हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। चाइनीज मांझे से हर साल कोई न कोई जानलेवा दुर्घटना होती है। गतवर्ष वाहन चलाते हुवे एक ज्वालापुर निवासी व्यक्ति की गर्दन की नस तक कट गई थी, जिसका हरिद्वार के सिटी हॉस्पिटल में कई ऑपरेशन के बाद जीवन बच पाया था। जनता को दिखाने के लिये जिला प्रशासन जो कार्यवाही करता है उससे चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कोई विशेष प्रभाव नही पड़ता जिसके कारण गली मोहल्लों में पतंगबाजों को आसानी से मांझा मिल जाता है। स्कूटी या बाइक से जाते समय यदि किसी पतंग की डोर जमालपुर निवासी विकास के गले मे लग गयी तो जीवन लीला भी समाप्त हो सकती है। समाजसेवी अंकित राठौड़ की प्रशासन से मांग है कि वो ढुलमुल रवैया छोड़कर चायनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे। माया विहार निवासी विकास किसी कार्य से जा रहा था तो मांझा उसका मास्क को काटता हुवा हाथ और गला भी जख्मी कर गया। हरिद्वार शहर और गांव की जनता जिला प्रशासन से तत्काल चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाने की मांग करती हैं मगर देखना यह है कि अभी जिला प्रशासन को कितनी और दुर्घटनाओं का इंतजार है। आम जनता को भी चाहिए कि वो अगले कुछ दिन छोटे बच्चों को वाहन पर आगे बैठा कर न चले। वाहन की गति भी सीमित रखे ताकि चाइनीज मांझे से किसी हद तक स्वयं को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचा सके।
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