हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(यतेंद्र कुमार) हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस मित्र पुलिस के नाम से विश्व में जानी जाती है। उसका उदाहरण यह है कि जब-जब लोगों को पुलिस की आवश्यकता होती है तो पुलिस (24*7) लोगों के लिए सदैव तैनात रहती है। पहाड़ी क्षेत्र की बात हो या बात हो शहरी क्षेत्र की मित्र पुलिस लोगों के लिए यमदूत बन कर आई है और लोगो की जान भी बचाई है। पर कहीं-कहीं देखा गया है कि कुछ पुलिसकर्मियों की वजह से मित्र पुलिस पर भी संकट मंडराने लगता है। कोविड-19 के चलते उत्तराखंड मित्र पुलिस ने दिन-रात ड्यूटी पर तैनात रहकर लोगों को कोविड के बारे में जागरूक किया। और लोगों से घर से बाहर न निकलने की अपील भी की थी, जिसके चलते लोगों ने पुलिस के कार्यों की खाफी सराहना भी की थी। पर अब देखा जा रहा है कि मित्र पुलिस जनता से सौतेला व्यवहार कर रही है। उसका कारण यह है कि राजनेताओं से लेकर रेलियों में बहुत संख्या में लोगों को बिना माक्स के देखा जा रहा हैं। पर हरिद्वार पुलिस इनके चालान काटने में विफल साबित हो रही है। तो वहीं ज्वालापुर रेल चौकी पुलिस दिन-रात चौकी के बाहर ही खड़े हो कर अपनी जिम्मेदारी को बहुत ही बखूबी से निभा रही है, और कोरोना का संकट ना फैले उसको देखते हुए लोगों के बिना माक्स, बिना हेलमेट पर चालान काट रही है। पर इंचार्ज साहब कॉस थोडा अवैध शराब पर भी इस तरह का शिकंजा कसने में अपनी जिम्मेदारी समझें। युवा पीढ़ी नशे की लत में होकर बर्बादी की ओर सीढ़ी चढ़ रही है। और दिन दुगनी रात चौगनी तरक्की कर रही है, ओर अवैध शराब का धंधा ज्वालापुर क्षेत्र में फल-फूल रहा है, ऊपर से सबसे खास बात यह है कि अवैध शराब का कारोबार करने वालों के हौसले इतने बुलन्द है की शराब माफियों ने चप्पे-चप्पे पर अपने नेटवर्क फैला रखे है। फोन आते ही होम डिलीवरी शुरू हो जाती है। और पुलिस के हाथ इन शराब माफियाओं तक नही पहुच पाते है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ज्वालापुर पुलिस अवैध शराब को रोकने में सफल हो पाएगी या खाली मास्क व हेलमेट के चालान काटने में खानापूर्ति करती रहेगी, य तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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