हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार में उप कुम्भ मेला अधिकारी, सचिव प्राधिकरण हरबीर सिंह किसी परिचय के मोहताज नही है। उसका कारण उनकी कर्तव्यनिष्ठा, मिलनसार स्वभाव, अपनी जिम्मेदारियों को भलीभांति से निभाना है। अन्यथा हरिद्वार के अंदर ऐसे अधिकारियों की कमी नही जो न सिर्फ अपने फर्ज से भागने का प्रयास करते हैं। बल्कि उनकी कार्यक्षेत्र से सम्बंधित किसी समस्या को लेकर यदि जनता ही नही अपितु समाज हित मे कार्य करने वाले मीडियाकर्मियों के फोन, एसएमएस या वाट्सप पर सम्पर्क करने पर भी प्रतिक्रिया देने से बचते हैं। ऐसे में हरबीर सिंह अपने कार्यकाल में इसलिए चर्चा में रहे है कि पूरे लोकडॉन में उन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना स्वमसेवी संस्थाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने फर्ज से कही ज्यादा बढ़कर व्यक्तिगत रुचि लेकर कोरोना काल मे पीड़ितों की हर सम्भव मदद की। इसलिए वो हरिद्वार के उन चुनिंदा अधिकारियों मे से है जो अपने फर्ज से भागना नही उनका सामना करते हैं। फोन पर प्रतिक्रिया देने से बचते नही, बल्कि कॉल करने वाले को उसकी समस्या सुनकर यथायोग्य समाधान करके पीड़ित जन को खुशी प्रदान करते हैं। कोरोना काल मे जब कोई सूचना या जानकारी लेनी पड़ी हो और अन्य अधिकारी फोन पर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हो ऐसे में हरबीर सिंह ही सम्बंधित जानकारी देकर समाज के लोगो को लाभान्वित करते थे। अपने फर्ज से भागने वाले अधिकारियों के पास फोन न उठाने का सबसे बड़ा शस्त्र होता है, मीटिंग में हूँ। अरे मीटिंग में हो तो एसएमएस से कॉल करने वाले का उद्देश्य तो पता कर ही सकते हैं, या अपने पी.ए को फोन देकर कॉल करने वाले कि समस्या को नोट भी तो करा सकते है। मगर इन सब के लिये इच्छा शक्ति और व्यक्तिगत रुचि का होना जरूरी है। जो कि वर्तमान में बहुत कम अधिकारियों मे पाई गई हैं। वर्तमान कुम्भ मेला अधिकारी दीपक रावत भी अपने हरिद्वार जिलाधिकारी के कार्यकाल में मिशाल रहे। उनके पास यदि किसी बच्चे ने भी फोन किया तो उसे भी निराशा नही मिलती थी। हालांकि हरिद्वार जिलाधिकारी सी रविशंकर यदि किसी का फ़ोन नही उठा पाते तो शाम को उनके कार्यालय से कॉल करने वाले का उद्देश्य जानकर उसकी यथासंभव मदद करना भी सराहनीय हैं। उत्तराखंड में हरिद्वार जैसे जनपद मे अधिकारी अपनी पोस्टिंग कराने के लिये फर्जी मेडिकल तक बनवाने से पीछे नही हटते मगर हरिद्वार आकर वो कितना अपने फर्ज, जिम्मेदारी पूरी करते हैं। ये उत्तराखंड सरकार को ध्यान देने वाली बात है। हरबीर सिंह जैसे अधिकारी जहां राज्य सरकार के कामो को जनता तक पहुँचा कर किसी नही पार्टी के मुख्यमंत्री को जनता द्वारा वाह वाह दिलवाते है तो वही अपने फर्ज से भागने वाले फोन पर प्रतिक्रिया न देने वाले, चिट्टी चिट्टी, मीटिंग मीटिंग खेलने वाले अधिकारियों के कारण किसी भी सरकार को जनता के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है। राज्य सरकार को चाहिए कि वो हरबीर सिंह जैसे अधिकारियों को समय समय पर राष्ट्रीय पर्वो पर सम्मानित करके उनका उत्साहवर्धन करे तो वही अपनी जिम्मेदारियों से भागने वाले अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह समय रहते उनका डी प्रमोशन कर उचित दंड देने का कार्य करे।

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