हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। स्वामी विरजानन्द महाराज ने भारतीय शिक्षा व सामाजिक क्षेत्र में जनजागरण के लिए अपने विचारों से क्रांतिकारी शुरूआत की। उनकी इस परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य उनके शिष्य व आर्य समाज के सस्ंथापक स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज ने कर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में कार्य किया। अपने बाल्यकाल में पांचवें वर्ष की आयु में अपने नेत्रों की ज्योति खोने के बाद भी स्वामी विरजानन्द महाराज ने संतों से ज्ञान शिक्षा प्राप्त कर देश भर में भ्रमण कर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में कार्य किया। यह उद्गार गुरूकुल कांगड़़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री ने स्वामी विरजानन्द जयंती के अवसर पर आयोजित यज्ञ के अवसर पर उपस्थित शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होने कहा की यह हमारा सौभाग्य है कि हम सभी स्वामी विरजानन्द महाराज की परम्परा को आगे बढ़ाने वाले स्वामी दयानन्द सरस्वती के शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द महाराज द्वारा स्थापित शिक्षा के इस संस्थान से जुड़कर उनकी परम्परा को आगे बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो० दिनेश चन्द्र भट्ट ने कहा कि भारत के सन्तों ने दुनिया का मार्ग प्रशस्त किया है। स्वामी विरजानन्द महाराज व उनके शिष्य स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज, उनके बाद उनके शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द महाराज इन तीनों पीढ़ियों के सन्तों ने भारत ही नहीं दुनिया का मार्गदर्शन कर समाज की कुरीतियों के खिलाफ लड़ने की कार्य कर समाज का मार्ग प्रशस्त किया। परीक्षा नियंत्रक प्रो0 एम.आर.वर्मा ने कहा की गुरू शिष्य की परम्परा के महान संत स्वामी विरजानन्द महाराज ने अपने गुरूओं के द्वारा दिये गये ज्ञान का श्रवण कर उसने अर्जित ज्ञान को अपने शिष्य स्वामी दयानन्द सरस्वती को देकर समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए कार्य करने के लिए कहा जिस दिशा में स्वामी दयानन्द ने कायम कर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में कार्य किया। आज देश सभी स्वामी विरजानन्द महाराज की नमन करते है। संस्कृत विभाग के प्रो० सोमदेव शतांशु ने यज्ञ कराया। यज्ञ में समस्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

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