हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। वैश्विक माहमारी कोविड ने व्यक्ति के सामने एक नई तरह की चुनौती खडी कर दी है। शायद इस चुनौती के बारे मे व्यक्ति ने दूर-दूर तक कभी सोचा भी नही होगा। कोविड से पहले की स्थिति पर विचार करते चले तो व्यक्ति के चारो ओर स्वतंत्रता का वातावरण अधिक ताकतवर हो गया था। बिना किसी बंदीश के व्यक्ति अपनी इच्छानुसार काम करने तथा  परिणाम प्राप्त करने का आदि होता जा रहा था। जीवन के सिद्वान्त तथा नैतिक मूल्य जिन पर समाज की पृष्ठभूमि टीकी हुई है, महत्वहीन हो गई थी। जिंदगी का आलम यह हो गया कि अर्थ (धन) के सामने सभी मौलिक सिद्वान्त तथा मूल्यों का मापदण्ड बिगड गया था। कोई भी कार्य असंभव नही रह गया था। परन्तु कोविड ने व्यक्ति को एक क्षण मे यह अहसास करा दिया कि ज्ञान-विज्ञान के बल पर सृजन की नई इबारत लिखी जा सकती है लेकिन मानवीय मूल्यों के साथ समझौता करके नैतिक मूल्यों का हनन भी बर्दाश्त नही होगा। प्राचीन परम्परा व्यक्ति की अमूल्य सम्पदा है
जिसकी सहायता से नये सृजन की कल्पना करना स्वभाविक है। परन्तु प्राचीन परम्परा, संस्कृति एवं सभ्यता को नष्ट करके उसके ऊपर आधुनिकता का भवन बनाना बुद्विमानी नही है। कोविड ने भारतीय संस्कृति एवं उसके महत्व को समझाने के लिए जिस प्रकार की स्थितियाॅ पैदाकर दी है उनको देखकर स्मरण होने लगा है कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता कितनी वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक है। बहुत ज्यादा पुरानी बात न करके केवल दो-तीन दशक पूर्व की स्थिति का स्मरण किया जाये तो पता चलता है कि दैनिक जीवन के जिन क्रियाकलापो को हम दकियानुसी आडम्बर तथा अवैज्ञानिक मानते थे वैश्विक महामारी कोविड ने फिर वही स्थिति पैदा करते हुए हमारी ऋषि परम्परा तथा हमारे वैज्ञानिक होने का प्रमाण दे दिया है। जीवन की सामान्य सी बात भोजन करने से पहले घर से बाहर हाथ-पैर मुह आदि धोकर भोजन के लिए बैठना, खान-पान मे ऋतु के अनुसार भोजन करना, अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर स्वावलम्बी बनना, स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाना, शारीरिक श्रम को महत्व देना, तकनीक एवं उपकरणों पर आधारित कृषि न करके स्वदेशी एवं भारतीय संसाधन परक खेती करना आदि। कोविड के कारण देश मे उपजी स्थिति मे विदेशी वैज्ञानिक हमे हमारी ही संस्कृति का ज्ञान देकर महामारी के इस खतरे को कम करने की सलाह दे रहे है। और हम उनकी बात सुनकर उन्हे अधिक विकसित तथा प्रखर बुद्विमान मानकर अनुसरण करने को बेबस है।
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