हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम भारातपुर निवासी असगरी आपा 118 वर्ष की उम्र हो जाने पर भी रमजान उल मुबारक के सभी रोजा रखने के साथ-साथ नमाज और दूसरी इबादतों में मशगूल रहती हैं। वह बताती है कि उनका जन्म सन् उन्नीस सौ एक का है, और जब से उन्होंने होश संभाला है तभी से आज तक नमाज व रोजा रखने का लगातार एहतमाम कर रही हैं। उनके मन में देश की आजादी यादें आज भी तरोताजा है। देश के बंटवारे की घटना को याद कर वह आज भी सिहर उठती हैं। खुद अशिक्षित होने के साथ-साथ असगरी आपा अपने परिवार के पोता-पोतियो तथा गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करती हैं। वह कहती हैं कि शिक्षा से ही जीवन में उजियारा लाया जा सकता है, इसलिए वह शिक्षा के महत्व को जोर देकर ग्रहण करने पर बल देती हैं। वह बताती हैं की आजादी मिलने के बाद पचास के दशक में मतदान बैलट पेपर से नहीं होने पर हाथ उठाकर ही गांव का सरपंच (प्रधान) आदि का चयन हो जाया करता था। आज के चुनाव में अब डिजिटल का रूप ले लिया है, जो ईवीएम के रूप में हमारे सामने है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। देश आज तरक्की की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। कुल 22 सदस्यों का भरा-पूरा परिवार आज अपनी दादी अम्मा के 118 वर्ष में प्रवेश करने पर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है तथा उनसे सुबह-शाम आशीर्वाद लेना भी नहीं भूलता।



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