हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार जिसे डबल इंजन की सरकार भी कहा जाता है, चुकी केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है। उसके बावजूद उत्तराखंड के हरिद्वार देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग जो कि कई वर्षों से बनता आ रहा है। यह अभी तक नही बनने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर हरिद्वार जर्स कंट्री से लेकर नेपाली फॉर्म तक 1 किलोमीटर चलने में 2 - घण्टे भी लग रहे हैं। यहाँ की यातायात व्यवस्था बनाने में पुलिस प्रशासन को नाको चने चबाने पड़ते है। यहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था बनाने के लिये पुलिस प्रशासन को यहां के लोकल लोगो के वाहनों को विभिन्न मार्गों पर डायवर्ट करना पड़ता है। जिसके कारण यात्रियों ही नही लोकल लोगो को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जान पर तब बन जाती है जब कोई एम्बुलेंस इस सड़क जाम में फंस जाय। उत्तराखंड सरकार औऱ केंद्र सरकार जनता को होने वाली असुविधा के प्रति कोई खास चिंतित दिखाई नही दे रही है। अन्यथा यात्रा सीजन आने से पहले सड़क नही बनवा सकते थे तो सड़को के गड्ढे भरवा ही सकते थे जिनको भरने के लिए जिलाधिकारी महोदय द्वारा अगस्त 2017 से मई 2018 तक सड़क सम्बंधित विभागों को कम से 10 बार चेतावनी देने के बावजूद अभी तक सड़को के 6-8 इंच गहरे गढ्डों के कारण कई लोग अपनी जान गवाँ चुके है। यही हाल उत्तराखंड के पौड़ी और देहरादून जिलों का है। जहाँ हरिद्वार से ऋषिकेश चीला बाय पास जो कि गंगा किनारे है उस पर जगह जगह सड़क के गढ्ढे भरने में सरकार या जिला प्रशासन गम्भीर नही है। ऋषिकेश की मुख्य सड़कों पर हमेशा जानवर गाय/ सांड आराम करने बैठे रहते है। मगर नगर निगम या जिला प्रशासन के लिए ये सामान्य बात है। इन सभी अव्यवस्थाओं को देखते हुवे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी कम जिम्मदार नही है। जिनके कार्यकाल में उत्तराखंड आने वाले यात्री गलत असुविधा वाली यादे लेकर अपने अपने राज्यो में जायेगे। इसकी फिक्र उत्तराखंड सरकार की किसी भी मन्त्री को मुश्किल ही होगी। इन सेवाओं के आधार पर ही त्रिवेंद्र रावत और उनके मंत्रिमंडल के लोग मोदीजी को 2019 में प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं?
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार जिसे डबल इंजन की सरकार भी कहा जाता है, चुकी केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है। उसके बावजूद उत्तराखंड के हरिद्वार देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग जो कि कई वर्षों से बनता आ रहा है। यह अभी तक नही बनने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर हरिद्वार जर्स कंट्री से लेकर नेपाली फॉर्म तक 1 किलोमीटर चलने में 2 - घण्टे भी लग रहे हैं। यहाँ की यातायात व्यवस्था बनाने में पुलिस प्रशासन को नाको चने चबाने पड़ते है। यहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था बनाने के लिये पुलिस प्रशासन को यहां के लोकल लोगो के वाहनों को विभिन्न मार्गों पर डायवर्ट करना पड़ता है। जिसके कारण यात्रियों ही नही लोकल लोगो को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जान पर तब बन जाती है जब कोई एम्बुलेंस इस सड़क जाम में फंस जाय। उत्तराखंड सरकार औऱ केंद्र सरकार जनता को होने वाली असुविधा के प्रति कोई खास चिंतित दिखाई नही दे रही है। अन्यथा यात्रा सीजन आने से पहले सड़क नही बनवा सकते थे तो सड़को के गड्ढे भरवा ही सकते थे जिनको भरने के लिए जिलाधिकारी महोदय द्वारा अगस्त 2017 से मई 2018 तक सड़क सम्बंधित विभागों को कम से 10 बार चेतावनी देने के बावजूद अभी तक सड़को के 6-8 इंच गहरे गढ्डों के कारण कई लोग अपनी जान गवाँ चुके है। यही हाल उत्तराखंड के पौड़ी और देहरादून जिलों का है। जहाँ हरिद्वार से ऋषिकेश चीला बाय पास जो कि गंगा किनारे है उस पर जगह जगह सड़क के गढ्ढे भरने में सरकार या जिला प्रशासन गम्भीर नही है। ऋषिकेश की मुख्य सड़कों पर हमेशा जानवर गाय/ सांड आराम करने बैठे रहते है। मगर नगर निगम या जिला प्रशासन के लिए ये सामान्य बात है। इन सभी अव्यवस्थाओं को देखते हुवे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी कम जिम्मदार नही है। जिनके कार्यकाल में उत्तराखंड आने वाले यात्री गलत असुविधा वाली यादे लेकर अपने अपने राज्यो में जायेगे। इसकी फिक्र उत्तराखंड सरकार की किसी भी मन्त्री को मुश्किल ही होगी। इन सेवाओं के आधार पर ही त्रिवेंद्र रावत और उनके मंत्रिमंडल के लोग मोदीजी को 2019 में प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं?





Post A Comment:
0 comments so far,add yours