हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। किसी भी समाज या देश की अर्थव्यवस्था उस क्षेत्र के बैंक प्रबंधन और उनके कर्मचारियों का अपने ग्राहको के प्रति व्यवहार पर भी निर्भर करता है। अन्यथा नोट बंदी जैसे संवेदनशील मामलों में यदि मोदीजी ने सफलता पाई तो उसके पीछे भी बैंकों के मेहनती कर्मचारियों/अधिकारियों का हाथ रहा है। बीच बीच मे कुछ बैंकों के ढीठ टाइप के कर्मचारी ही नही अपितु बैंक अधिकारी भी ग्राहक से ऐसा व्यवहार कर जाते है जिससे कि ग्राहक खुद को बेचारा सा महशुस करता है। बार बार समाचार पत्रों में खबर देने के बावजूद के सभी सिक्के चलन में है अतः सिक्को के लेन देन में किसी तरह की कोई झिजक न करे। यदि कोई सिक्के लेने को मना करता है तो भारतीय मुद्रा के अपमान के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उसके बावजूद हरिद्वार निवासी ईशु जो कि एक छोटा व्यापारी है जब वह अपने सिक्के जमा करने अपने ही बैंक शाखा आईडीबीआई बैंक गया तो वहाँ के अधिकारी ने बहाने बना कर उससे सिक्के लेने को मना कर दिया। वह चाहता तो उस ग्राहक को अपने केबिन में बैठा कर आराम से कुछ सुझाव भी दे सकते थे। मगर उन्होंने उसे किसी भी तरह का कोई सहयोग करना जरूरी नही समझा। उससे अगले दिन जब हरिद्वार की गूंज से गगन शर्मा केनरा बैंक में गए और उस बैंक के मैनेजर से संकोच करते हुवे सिक्के लेने के बारे में पूछा तो उसने न सिर्फ 500 , 10000 या 20000 सीधे 3000 के सिक्के लेने के लिये हाँ कर दी। न ये पूछा कि आपका अकॉउंट कौन सा है न ही अन्ये किसी तरह से सिक्के लेने से बचने की कोशिश की। "केनरा बैंक जो कि हरिद्वार में प्रेमनगर आश्रम के अंदर है उसके कर्मचारियों/अधिकारियों का व्यवहार शुरू से ही ग्राहको के प्रति बहुत ही शालीन रहा है। बैंक प्रबंधक बदलते रहे मगर उनका ग्राहको के प्रति व्यवहार हमेशा से ही कुशल रहा है। ऐसे बैंक ही हमारे समाज और देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकते है। व्यापार भले ही कोई भी हो, मगर जो ग्राहक की नही सुनता है उस पर अपने नियम थोपता है उसके भविष्य की कोई गारंटी नही ले सकता है। अतः जागो ग्राहक जागो, यदि कोई भी व्यापारी या बैंक आपसे कुशल व्यवहार नही करता तो आपका अधिकार है कि उसके बड़े अधिकारी से उसकी शिकायत करके उस का बहिष्कार किया जाय।
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