हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। परिवार में जब कोई अपना आकस्मिक बिछड़ जाता है तो वो दर्द या तो समंझ सकता है जिसने अपना कोई खोया हो, या फिर उत्तराखंड के एडीजीे अशोक कुमार। जिनकी सराहनी
य पहल पर उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल में अज्ञात मानव शवो की शिनाख़्त और गुमशुदा की तलाश करने के अंतर्गत 15 अक्टूबर 2017 को चौरासी कुटी के पास गंगा में एक शव बरामद हुवा था। काफी शिनाख्त करने के बावजूद सफलता नही मिली। उसके बाद एडीजी अशोक कुमार की पहल पर मिशन शुरू किया गया। तो एसएसपी जगतराम जोशी के निर्देश में उपनिरिक्षक कृपाल सिंह ने सोशल मीडिया फ़ेसबूक/वाट्सअप के जरिये चौरासी कुटिया के निकट गंगा में मिले शव की फोटो वायरल की गई उससे पता चला कि जनपद पौड़ी गढ़वाल के गुप्तकाशी के थाने में 31 जून 2017 को गोविंद पुत्र डोमा लाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। वहाँ दर्ज वादी सन्दीप के मोबाइल पर जब उस मृतक की फोटो भेजी तो वादी सन्दीप ने अपने पिताजी को पहचान लिया। उसके बाद वो अपने अन्ये परिचितो के साथ थाने यहां आकर उन सभी ने मृतक गोविंद को पहचान लिया। उसके पुत्र सन्दीप ने बताया कि हम तो पिछले 10 महीने से ढूंढ रहे थे। अपने पिताजी के शोक में डूबे सन्दीप को कृपाल सिंह ने गले लगाकर सांत्वना दी। प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में ही उत्तराखंड की पुलिस की चर्चा आये दिन होती रहती है। कभी चार धाम यात्रा के दौरान किसी हार्ट अटैक के मरीज को उपनिरक्षक द्वारा अपने ऊपर रखकर 2 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुँचा कर जीवन दान दिलाना बहुत सराहनीय कार्य था। पूरे देश की अगर बात की जाय तो उत्तराखंड पुलिस संवेदनशीलता और अपनी सूझ बूझ के कारण नम्बर वन है। बड़े से बड़ा मेला या अन्ये आयोजन हो या कोई भी आपराधिक वारदात के खुलासा उसमे कैसे सफलता लेनी है ये हुनर तो कोई इनसे सीखे।
क्षेत्राधिकारी कोटद्वार जे. आर जोशी, सी ओ कोटद्वार व प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज मैंनवाल ने जनता खासतौर से युवा वर्ग से अपील की गयी है कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से अज्ञात शवो की और गुमसुदगी वाली फ़ोटो को पहचानने की कोशिश करे, यदि पहचान नही पा रहे तो उन्हें आगे व्हाट्सएप ग्रुप/ फ़ेसबूक के माध्यम से आगे भेजने का प्रयास करे। जब हमारा कोई अपना बिछड़ता है तो यही उम्मीद हम अन्यो से करते है कि वो भी हमारी मदद करे, तो मानवता का फर्ज कहता है कि हमे भी निःस्वार्थ भाव से कुछ काम ऐसे करने चाहिए जिससे कि पुलिस विभाग का काम सरल हो जाये,इस मुहिम में उपनिरिक्षक ओम सिंह, उपनिरक्षक कृपाल सिंह, हेड कॉन्स्टेबल नरेश नोटियाल, कांस्टेबल मनोज नेगी, लक्ष्मण सिंह , संजीव यादव, कॉन्स्टेबल चन्द्रपाल, कपिल कुमार, टेक्निकल टीम से हेडकांस्टेबल बचन सिंह राणा, भानु प्रकाश, विक्रम सिंह का योगदान सराहनीय रहा।
(गगन शर्मा) हरिद्वार। परिवार में जब कोई अपना आकस्मिक बिछड़ जाता है तो वो दर्द या तो समंझ सकता है जिसने अपना कोई खोया हो, या फिर उत्तराखंड के एडीजीे अशोक कुमार। जिनकी सराहनी
य पहल पर उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल में अज्ञात मानव शवो की शिनाख़्त और गुमशुदा की तलाश करने के अंतर्गत 15 अक्टूबर 2017 को चौरासी कुटी के पास गंगा में एक शव बरामद हुवा था। काफी शिनाख्त करने के बावजूद सफलता नही मिली। उसके बाद एडीजी अशोक कुमार की पहल पर मिशन शुरू किया गया। तो एसएसपी जगतराम जोशी के निर्देश में उपनिरिक्षक कृपाल सिंह ने सोशल मीडिया फ़ेसबूक/वाट्सअप के जरिये चौरासी कुटिया के निकट गंगा में मिले शव की फोटो वायरल की गई उससे पता चला कि जनपद पौड़ी गढ़वाल के गुप्तकाशी के थाने में 31 जून 2017 को गोविंद पुत्र डोमा लाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। वहाँ दर्ज वादी सन्दीप के मोबाइल पर जब उस मृतक की फोटो भेजी तो वादी सन्दीप ने अपने पिताजी को पहचान लिया। उसके बाद वो अपने अन्ये परिचितो के साथ थाने यहां आकर उन सभी ने मृतक गोविंद को पहचान लिया। उसके पुत्र सन्दीप ने बताया कि हम तो पिछले 10 महीने से ढूंढ रहे थे। अपने पिताजी के शोक में डूबे सन्दीप को कृपाल सिंह ने गले लगाकर सांत्वना दी। प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में ही उत्तराखंड की पुलिस की चर्चा आये दिन होती रहती है। कभी चार धाम यात्रा के दौरान किसी हार्ट अटैक के मरीज को उपनिरक्षक द्वारा अपने ऊपर रखकर 2 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुँचा कर जीवन दान दिलाना बहुत सराहनीय कार्य था। पूरे देश की अगर बात की जाय तो उत्तराखंड पुलिस संवेदनशीलता और अपनी सूझ बूझ के कारण नम्बर वन है। बड़े से बड़ा मेला या अन्ये आयोजन हो या कोई भी आपराधिक वारदात के खुलासा उसमे कैसे सफलता लेनी है ये हुनर तो कोई इनसे सीखे।
क्षेत्राधिकारी कोटद्वार जे. आर जोशी, सी ओ कोटद्वार व प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज मैंनवाल ने जनता खासतौर से युवा वर्ग से अपील की गयी है कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से अज्ञात शवो की और गुमसुदगी वाली फ़ोटो को पहचानने की कोशिश करे, यदि पहचान नही पा रहे तो उन्हें आगे व्हाट्सएप ग्रुप/ फ़ेसबूक के माध्यम से आगे भेजने का प्रयास करे। जब हमारा कोई अपना बिछड़ता है तो यही उम्मीद हम अन्यो से करते है कि वो भी हमारी मदद करे, तो मानवता का फर्ज कहता है कि हमे भी निःस्वार्थ भाव से कुछ काम ऐसे करने चाहिए जिससे कि पुलिस विभाग का काम सरल हो जाये,इस मुहिम में उपनिरिक्षक ओम सिंह, उपनिरक्षक कृपाल सिंह, हेड कॉन्स्टेबल नरेश नोटियाल, कांस्टेबल मनोज नेगी, लक्ष्मण सिंह , संजीव यादव, कॉन्स्टेबल चन्द्रपाल, कपिल कुमार, टेक्निकल टीम से हेडकांस्टेबल बचन सिंह राणा, भानु प्रकाश, विक्रम सिंह का योगदान सराहनीय रहा।





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