हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। एक जमाने में लक्सर रोड के अजीतपुर गांव ही नही अपितु आस पास कई गांव के लोग कल्ले की चाट खाकर अपने मुंह का जायका ठीक किया करते थे। 1982 से लोगो को अपनी चाट और गोल गप्पे खिलाकर अपना दीवाना बनाने वाले कल्ले की चाट के अब भी दीवाने कम नही है। समय जरूर बदला, गूगल वाट्सप, फेसबुक के जमाने मे अब भले ही जोमैटो आदि से घर पर ही खाद्य पदार्थ मंगवाकर खाने की सुविधा हो गयी हो। मगर बच्चे ही नही, बुजुर्ग जवान लोग अब भी लक्सर रोड से जाते समय "कल्ले की चाट" की ठेली देखकर वाहन के ब्रेक लगा देते हैं। वही पहले वाला स्वाद, वही कुशल व्यवहार, उम्र भले ही अब ज्यादा हो गयी हो बुजुर्ग हो गए हैं। मगर आज भी आप को अजीतपुर पंजनहेड़ी के बीच मे अपनी ठेली पर चाट बेचते "कल्ले जी" मिल जायेंगे। आप भी जब भी कभी इधर से गुजरे इस चाट वाले कल्ले की चाट और गोल गप्पे का स्वाद लेकर अवश्य जाय। मत भूलिए कि जिस पेड़ ने अपनी जवानी में आपको खूब फल खिलाये हो उसके अंतिम समय भी वही प्यार और महत्व मिलना चाहिए।
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