हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आयुर्वेद आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण की धर्म माता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती की गुरु बहन सुभद्रा मां आज रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम दोपहर 2:30 बजे ब्रह्मलीन हो गई। उन्होंने अंतिम सांस रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय में ली, सुभद्रा मां 89 वर्ष की थी और वे कई वर्षों तक  हिमालय क्षेत्र के तपोवन में कठोर तपस्या करती रही। उन्हें तपोवन से आचार्य बालकृष्ण अपने साथ कनखल दिव्य योग मंदिर लेकर आए और उनकी धर्म माता के रूप में सेवा की, वे कुछ महीनों से बीमार थी और रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में आचार्य बालकृष्ण ने उन्हें भर्ती कराया था और आचार्य बालकृष्ण और उनसे जुड़े लोग सुभद्रा मां की सेवा में लगे थे आचार्य के घर उनके लिए रोज सुबह नाश्ता जाता था और आचार्य श्री स्वामी रामदेव उनसे मिलते रहते थे सुभद्रा मां को कल शुक्रवार को उत्तरकाशी जिले के गंगोरी  क्षेत्र में असी गंगा घाट के पास स्थित आश्रम में भू समाधि दी जाएगी। सुभद्रा मां का संन्यासी पूर्व नाम वारिजा था  और वे मूल रूप से कर्नाटक के उडुपी की रहने वाली थी संन्यास दीक्षा के बाद वे हिमालय भ्रमण में आई और यहीं की होकर रह रही। आचार्य बालकृष्ण उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने उत्तरकाशी जाएंगे, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती उनके अंतिम संस्कार में पहुंचेंगी, अपनी गुरू बहन को भावुकता से याद करते हुए उमा भारती कहती है कि वह महान संत थी और उच्च कोटि की तपस्वी थी और उनका मन बहुत उदार था। आचार्य  बालकृष्ण ने बताया कि  मां  सुभद्रा उन्हें हिमालय क्षेत्र में  मिली थी और उन्हें  वे अपने साथ हरिद्वार कनखल लेकर आए भावुक होते हुए आचार्य श्री ने बताया कि  वे उन्हें मां की तरह  बहुत प्यार दुलार देती थी  और वे तपस्वी संत थी उनकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती। योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि  मां सुभद्रा  एक उच्च कोटि की संत थी और एक साधक की तरह उनमें मातृ भाव कूट-कूट के भरा था। मां सुभद्रा की सेवा में लगी मेरठ से आई उनकी शिष्या मीनाक्षी शास्त्री ने बताया कि उन्होंने उडुपी कर्नाटक में स्थित तेजावर मठ के पीठाधीश्वर उच्च कोटि के संत स्वामी विश्वेश्वर तीर्थ से महाराज से संन्यास  दीक्षा ली थी। वह उत्तराखंड क्षेत्र में गंगोत्री धाम से 25 किलोमीटर ऊपर हिमालय के तपोवन क्षेत्र के इस बर्फीले क्षेत्र में लगातार 9 वर्षों  1987 से 1996 कठोर तपस्या की थी  आज पंचांग तिथि के अनुसार माघ मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी के दिन स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर रामकृष्ण मिशन अस्पताल के संतो और चिकित्सकों ने उन्हें सुबह माला पहनाई उनकी पूजा-अर्चना की और उन्हें प्रसाद दिया उन्होंने बड़ी ही आत्मीयता से प्रसाद ग्रहण किया और दोपहर बाद स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन वह ब्रह्म में विलीन हो गई उनके निधन की खबर से संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। मठ और मिशन के सचिव स्वामी नित्यशुद्धानंद महाराज ने बताया कि आज सुबह स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर मां सुभद्रा ने पूजा स्वीकार की जिसमें संत लोग रोगियों की अगरबत्ती धूप से पूजा करते हैं और फल वितरण करते हैं। कुछ देर उपरांत करीब 2:30 बजे उनका देहावसान हो गया  वे विनम्रता की प्रतीक थी  सुभद्रा मां के भक्त लगातार उनसे संपर्क में थे और वे उनके अस्पताल होने के बावजूद सेवा में आते रहते थे। और मैं अपने हाथों से उनको सबको यथासंभव प्रसाद वितरण करती थी जिसे पाकर वे हमेशा धन्य हो जाते थे आज वह मां का साया सबके सिर से उठ गया वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर संजय शाह ने बताया कि  हिमालय तपोवन में 9 सालों तक कठोर तपस्या करने पर उनके शरीर की मांसपेशियां अत्यंत गल गई थी और 1997  में उन्हें हिमालय तपोवन से श्री रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल लाया गया और उनका इलाज किया किया गया स्वस्थ होने के बाद 1998 में वे मानसरोवर और मुक्ति नारायण की तीर्थ यात्रा पर गई मां सुभद्रा की सेवा में लगी हुई राधिका नागरथ बताती है कि मां हरमन प्यारी थी और वे हर किसी के हाथ से खाना बड़े प्यार से खा लेती थी और जो भी उनके लिए कोई फल वगैरह लेकर आता तो वे उसे भक्तों में बांट देती और अस्पताल के प्राइवेट कक्ष में वे सत्संग करती थी मां के लिखे हुए भजन जब मैं उनको सुनाती तो वह उसमें से गलतियां निकालती और सही करती थी मिशन के स्वामी दयाधिपानंद जब उनसे कन्नड़ भाषा में बात करते तो भी बहुत खुश होती थी                                    आज उनके अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल में तांता लगा हुआ है देश के कोने कोने से उनके भक्त आ रहे हैं। सुभद्रा मां को रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतो स्वामी उमेश्वरानंद मंजू महाराज, स्वामी जगदीश महाराज स्वामी दयाधिपानंद महाराज, स्वामी हरि महिमानंद महाराज, स्वामी देवता नंद महाराज, डॉक्टर चौधरी, डॉक्टर संजय शाह, कुलदीप,मुंबई से आई मां सुभद्रा  की बहनें  बसंती और वनजा,डॉक्टर राधिका नागरथ, शैलेंद्र सक्सेना, चंद्रमोहन, मीनाक्षी आदि ने मां की पार्थिव देह के पास शांति पाठ किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी  कनखल निवासी रानी ने  भी उनकी बहुत सेवा की।

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