हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। कहते हैं कि यदि पड़ोसी के घर आग लगी हो और आप आराम कर रहे हो तो अगला नम्बर आपका भी हो सकता है। इन दोनों बच्चों के अभिभावकों से पूछो कि उनके दिल पर इस समय क्या बीत रही होगी। जिन बच्चों को एक एक दिन पाल पोषकर बड़ा किया एक दिन जरा सी चूक उनकी दुनिया मे अंधेरा कर देगी ये अनहोनी के बाद ही पता चलता है। जिस पुलिस विभाग ने अपनी अधिकांश ऊर्जा हैलमेट चैकिंग में लगा रखी हो, सीपीयू निरन्तर सड़क सुरक्षा में लगी हो। उनके लिये हमारी सोच, हमारी धारणा हम हैलमेट चालान से बचने के लिये खरीदते हैं, न कि दुर्घटनाओं से स्वयं को बचाने। धिक्कार है उस देश की महंगी महंगी शिक्षा व्यवस्था पर जो स्कूल, कॉलेजों में यातायात के नियमो को बताना आवश्यक नही समझते। सड़को पर समाज मे पुलिस का कार्य जितना आसान होगा उस देश की शिक्षा व्यवस्था उतनी ही मजबूत कहलाएगी। पीएचडी करने के बाद भी यदि केरल, कश्मीर आदि राज्यो में युवा आंतकवादी बनते हैं या एमबीबीएस करने के बाद भी किसी को यातायात के नियमो का  पालन करना गैर जरूरी, शराब पीना जरूरी लगता है। तो ऐसी सीबीएसई या अन्य बोर्ड की पढ़ाई से कही अच्छी गुरुकुल की शिक्षा होती थी। हरिद्वार के प्रसिद्ध समाजसेवी और व्यापारी भोला शर्मा ने हाथ जोड़कर हरिद्वार पुलिस के आला अधिकारियों से करुणामय अपील की है कि हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस की सख्ती से ड्यूटी लगाई जाए कि जो शराब पीकर वाहन चलाये उसका न सिर्फ वाहन सीज किया जाय साथ ही उसका वाहन लाइसेंस भी लम्बी अवधि के लिये जब्त किया जाय। भले ही वह स्वयं को कितना बड़ा राजनेता, प्रतिनिधि या पुलिस स्टाफ बताता हो। क्योकि भोला शर्मा की आंखों के सामने हरिद्वार के भगत सिंह चौक पर 3 सड़क दुर्घटना हुई जिसमें 2 युवाओं की हालत अत्यधिक खराब देखी गयी। उन्होंने 3 बजे तक संघर्ष करके उन दुर्घटनाग्रस्त युवाओं की मदद में कोई कमी नही छोड़ी। जिसके लिये उन्हें एक कार्यक्रम में सम्मानित भी किया गया। 

*अपने बच्चों को जीवन दे, स्कूटी या बाइक नही*

बड़े फिजूल लगते हैं पुलिस के ये सड़क पर लगे बोर्ड। काश इन बोर्ड का महत्त्व वाहन चालक और जनता समय रहते समझ ले। शायद देश की बद्दतर शिक्षा नीति के चलते ही देश मे न सिर्फ बेरोजगारों की संख्या बढ़ने पर है साथ ही विश्व मे सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाये भारत मे ही होती है।

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