हरिद्वार की गूंज (24*7)

(राव ज़ुबैर पुंडीर) गागलहेड़ी। यह कस्बा जिले का एक केंद्र बिंदु है। इसके बाद भी यहां बस स्टैंड की सुविधा नहीं है। बाजार में वाहन सड़क पर खड़े रहते है। इस कारण अन्य वाहन चालक और राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, बल्कि यातायात भी बाधित हो जाता है। हर समय कस्बे में पुलिस के रहने के बाद भी टेढ़े मेढ़े खड़े वाहनों के कारण दुर्घटना का भय बना रहता है। कस्बे के मुख्य चौक पर ऑटो की भरमार होने के कारण अतिक्रमण अपनी सीमाएं लांघ चूका है। वही सहारनपुर से देहरादून की ओर जाने वाली रोडवेज बसे भी इन ऑटो के बीच ही घुस जाती है। जहां आगे पीछे जाम की स्थिति बन जाती है। वही दूसरी ओर भगवानपुर व मुज्जफरनगर की ओर जाने वाली बसे व ऑटो मदरसे के गेट पर अपना जाल फैलाए बैठे है। जहां से निकलना बड़ा ही दुलर्भ हो चुका है। तीसरा स्थान सहारनपुर की ओर जाने वाले वाहनों ने तीसरा ठिकाना मदन डॉक्टर के कोने पर बनाया हुआ है जहाँ घूमते ही इन ऑटो का मक्कड़ जाल बड़ी समस्या उतपन्न करता दिखाई दिया जा सकता है। कस्बे में 100 से अधिक ऑटो और दो दर्जन के करीब प्राइवेट बसे ओर दिन भर की रूटीन में आधा सैकड़ा के करीब निकलने वाली रोडवेज बसे दिनभर कस्बे के बाजार में अजीबो गरीब माहौल बना रहता है। इस कस्बे में एक बस स्टैंड ना होने की वजह से ऑटो बसों ने कस्बे के बाजार को मक्कड़ जाल की तरह बुन दिया गया है। ऑटो व प्राइवेट बस चालको की तो पूछिए ही मत यहां हाल इतना खराब हो चुका है कि यह तो सड़क के बीचों बीच लगाकर ऐसे सवारियां भरते नजर आते है जैसे कि प्राइवेट एक स्टैंड विरासत में लेकर आए हो। यहां बस व ऑटो की प्रतीक्षा में खड़ी सवारियों के लिए यात्री प्रतीक्षालय भी नही बनवाया गया है। जहां बस के इंतजार में घण्टो घण्टो तक यात्री खड़े होकर इंतजार करते दिखाई देती है। यात्रियों के लिए एक बेच तक भी नही बरसो से बिछाई गई है। जिससे बच्चे बूढ़े सड़क किनारे जमीन पर ही बैठकर इंतजार करते दिखाई देते है।

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