हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। ऋषिकेश हरिद्वार रूठ पर पौड़ी गढ़वाल जनपद के गंगाभोगपुर गांव से लगभग 8 किलोमीटर राजाजी राष्ट्रीय पार्क जो अब राजाजी टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में माँ विंदवासनी देवी का सिद्ध मंदिर है, जहां माता रानी के दर्शन करने के लिये न सिर्फ आस पास बल्कि देश के अन्य राज्यो और विदेशी श्रद्धालु भी आते हैं। यहां आने के लिये चीला और गंगाभोगपुर से सफारी खुली जीप भी किराए पर मिल जाती है। आसपास के क्षेत्र के लोग बाइक और अपने वाहनों से भी आते हैं। रास्ते मे 4-5 जगह 3 से 4 फुट गहरा पानी भी बहता मिलता है। रोमांचक यात्रा और जंगल मे प्रकृति के साथ फोटो लेने वाले शौकीन लोगो के लिये यहाँ की यात्रा भरपूर आनंददायक और कभी न भूलने वाली रहती है। यहाँ से वापस लौटकर जाने वाले अपने प्रियजनों को यहाँ की रोचक यात्रा को बताना फोटो दिखाना कभी नही भूलते है। वनाधिकारी देशराज चौहान ने बताया कि यहां आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये रास्ते मे चुने से पत्थर और पेड़ रंगे हुवे है। इसके अलावा यात्रियों के द्वारा जंगली जनवरो की सुरक्षा का भी हर तरह से ख्याल रखा जाता है। इस सिद्ध पीठ मंदिर के बारे में यहां के महाराज विंदवासनी दास ने बताया कि जब कंस ने एक एक करके वासुदेव की कई कन्या मार दी तो वासुदेव जी कृष्ण को लेकर यशोदा के यहाँ छोड़ गए तो वहां योग माया पहले से जन्म ले चुकी थी। उसे लेकर वासुदेव कारागार आये तो वहां कंस ने उस योग माया कन्या को मारने के लिये जैसे ही पत्थर पर पटकना चाहा तो वो कन्या हाथ से छूटकर इसी पवित्र स्थान पर गिरी थी। उस कन्या अष्टभुजा धारण करके कंस से कहा कि तुझे मारने वाला तो पैदा हो चुका है। यह स्थान के नीचे बहने वाली नदी को विन्द नदी कहा जाता है। यह स्थान विंदवासनी के नाम से विख्यात हुवा। पहले इस स्थान पर गौरी घाट वाले बाबा हरद्वारी दास महाराज के तप के प्रभाव से यह मंदिर का निर्माण हुवा। पहले यहां सिर्फ एक छोटी सी गुफा हुवा करती थी अब यहां देश के कोने कोने से श्रद्धालु आते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण होने के बाद वो भंडारे भी कराते हैं। नवरात्रों के दिनों में यहां सामान्य से ज्यादा भक्तों का आवागमन रहता है।



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