हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार में पढ़ने वाले संस्कृत छात्रों को लोकडाउन काल में जिन समस्याओं से सामना करना पड़ा उससे सम्बंधित चर्चा के लिये उन्होंने ईश्वर निकेतन में बैठक की। छात्रों के अनुसार करोना कॉल से तथा उससे पूर्व से ही संस्कृत तथा संस्कृत के छात्रों का शोषण किया जाता रहा है। यही ही नही उनको अन्य सामाजिक गतिविधि से भी दरकिनार किया जाता रहा है। इसके लिये छात्र करोना कॉल संकट के समय में प्रत्यक्ष- प्रत्यक्ष समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक और उत्तराखंड के शासकीय प्रवक्ता शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को संस्कृत छात्रों के द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था। तब से लेकर अब तक आश्वासन के शिवा समस्या का निराकरण 4 माह बीतने के बाद अभी तक नहीं हुआ। शहरी विकास मंत्री के द्वारा आश्वासन दिया गया था कि संस्कृत छात्रों छात्रों को उनकी आर्थिक सहायता हेतु छात्रों के शिक्षण संसाधनों की पूर्ति तथा वित्तीय सहायता दी जाएगी। मगर अभी तक छात्र उस सहायता की प्रतिक्षा में ही है। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल संस्कृत और  संस्कृत के विद्यार्थियों का रहा तो पूरा संस्कृत संत जगत प्रत्येक महाविद्यालय में विरोध प्रदर्शन करने को विवश होगा। वही छात्र नेता कपिल जौनसारी ने कहा की यदि छात्रों की मांगों को दरकिनार किया गया तो विजयादशमी के पावन पर्व पर छात्रों की विजय कराने हेतु आंदोलन किया जाएगा। वही संस्कृत उपासक छात्र सेवक मोहित जोशी ने कहा की देवभूमि व धर्मनगरी हरिद्वार में पहला अधिकार संस्कृत का है।  यदि संस्कृत के विद्यार्थियों का शोषण किया गया उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो सभी संस्कृत छात्र एक जगह एकत्र होकर इसका विरोध प्रदर्शन करेगे। वही युवा संस्कृत छात्र नेता अभिनव तिवारी ने कहा कि पूर्व से ही संस्कृत के छात्रों के हितों का हनन होता रहा है। स्थानीय सांसद केंद्रीय मंत्री मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक होने के बावजूद भी संस्कृत की दशा सुधर नहीं रही है। बैठक में शुभम पंत, करण अत्री, गोविंद, आनंद, विश्वात्मा नंद, लक्ष्य भट्ट अनेक संस्कृत छात्र मौजूद रहे।

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