हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारत एक जमीन का एक टुकडा नही जिसे विरोधी जीतने का प्रयास कर सके। बल्कि भारत एक सौ तीस करोड लोगों की भावनाओं, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं गौरव का वह तेजपुंज है जिससे पाने के लिए विरोधियों ने जब भी नजरे तिरछी की तभी इस देश के रणबांकुरों ने उन्हे ऐसा कडा सबक सीखाया की दूसरी बार इस देश पर कुदृष्टि डालने की उनकी हिमाकत नही हुई। अदम्य साहस एवं वीरता से भरी हमारे देश की तीनों सेनाएं बल, शक्ति तथा प्रदर्शन में दुनिया की किसी भी शक्तिशाली सेनाओं से कम नही है।
आज हम उसी अदम्य साहस एवं शक्ति का परिचय देने वाले वीर सैनानियों की विजय गाथा को याद करके उनके बलिदान को नमन करते है। आज से 20 साल पहले यानी 1999 में 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में विजयी हासिल की। इसलिए हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 3 मई 1999 को सर्वप्रथम युद्ध की शुरूआत पाकिस्तान ने की और करीब 3 महीनें बाद 26 जुलाई 1999 को आज ही के दिन पाकिस्तान को हराकर विजय हासिल करने के उपलक्ष्य में कारगिल विजय दिवस की शुरूआत हुई। इस युद्ध को हर भारतवासी गर्व के साथ हर साल याद करता है।
युद्व मे भारत ने अपने 527 वीर जवान खो दिए- भारतीय सेना ने कारगिल में करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर पाकिस्तानी सेना को मात देकर अपना तिरंगा लहराया था। युद्ध में भारत व पाकिस्तान दोनों तरफ के जवानों की शहादत हुई। भारत ने करीब 527 सैनिकों को खोया और 1300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए, जबकि पाकिस्तान के अनुसार उनके 357 सैनिक इस युद्ध में मारे गए थे। वहीं 665 से ज्यादा सैनिक घायल हुए थे। इसकी जानकारी पाकिस्तानी सेना की वेबसाइट पर उपलब्ध थी।
भारतीय रिपोर्ट के अनुसार इस युद्व मे पाकिस्तान के 1200 सैनिक मारे गए, भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जानें की एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान के करीब 1000-1200 सैनिकों की इस युद्ध में मौत हुई थी। 200 सैनिकों को तो भारत में ही दफना दिया गया था। हालांकि पाकिस्तान इस रिपोर्ट को हमेशा नकारता रहा है। सबसे पहले एक चरवाहे ने दी थी पाकिस्तानी कब्जे की सूचनाः पाकिस्तानी सेना के करीब 5000 सैनिकों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए 3 मई 1999 को कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। इस बात की सूचना भारतीय सेना को एक चरवाहे ने दी कि पाकिस्तान ने कारगिल पर कब्जा कर लिया है। भारतीय सेना जब पेट्रोलिंग करने गई तो उन्हें पकड़ लिया गया और उसके 5 जवानों की हत्या कर दी गई। पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पोस्ट को तहस नहस कर दिया था।
मिग-27 व मिग-29 के जरिए भारत ने किया युद्ध का आगाज
भारतीय सेना ने इस बात की जानकारी जब सरकार को दी तो सेना को पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने का आदेश दिया गया। इस दौरान सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कार्रवाई की। भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान को खदेड़ने के लिए मिग-27 व मिग-29 का इस्तेमाल किया गया। इस अभियान में लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया। पाकिस्तान ने जहां कब्जा किया था, उन ठिकानों पर भारतीय वायुसेना ने बमबारी किया। इस दौरान आर-77 मिसाइलों के जरिए हमला किया गया। पाकिस्तान ने भारतीय विमान मिग-17 को मार गिराया था, जिसमें हमारे 4 फौजी शहीद हो गए थे।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे भयावह युद्ध
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कारगिल युद्ध को ही इतिहास का सबसे भयावह युद्ध माना जाता है क्योंकि इस युद्ध में भारी मात्रा में विस्फोटक, रॉकेट, मिसाइल, तोप और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया था। सेना के अधिकारियों के अनुसार कारगिल वॉर में करीब ढाई लाख गोले, पांच हजार बम व 300 से अधिक मोर्टार दागे गए थे। बताया जाता है कि कारगिल लड़ाई के 17 दिनों तक हर दिन प्रति मिनट एक दफा फायर किया जाता था। इसीलिए इस युद्ध को द्वितीय विश्व युद्ध से तुलना किया जाता है।
कारगिल युद्ध का संक्षेप में घटनाक्रम
1. 3 मई को एक कश्मीरी चरवाहे ने भारतीय सेना को बताया कि पाकिस्तानी सेना ने कारगिल पर कब्जा कर लिया है।
2. 5 मई को भारतीय सेना जब पेट्रोलिंग करने गई तो उन्हें पकड़ लिया गया व 5 जवानों की हत्या कर दी गई।
3. 27 मई को भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान को खदेड़ने के लिए मिग-27 व मिग-29 का इस्तेमाल किया गया।
4. 5 जून को भारतीय सेना ने पाक रेंजर्स द्वारा कब्जा किए जानें की सूचना भारतीय मीडिया को दी। भारत के अखबारों में यह खबर तहलका मचा दी।
5. 6 जून से भारतीय सेना ने पूरी ताकत से पाकिस्तान पर हमला करने का मन बना लिया। 9 जून को बाल्टिक की 2 चैकियों पर भारत ने तिरंगा फहराया।
6. 11 जून को भारत ने जनरल परवेज मुशर्रफ व पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल अजीज खान के बातचीत का आडियो रिकॉर्डिंग पूरी दुनिया के सामने जारी किया और बताया कि इस नापाक हरकत में पाक आर्मी का ही हाथ है।
7. 13 जून को भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर में तोलिंग पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना को खदेड़कर तिरंगा फहराया।
8. 15 जून को भारत-पाकिस्तान के युद्ध में अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने परवेज मुशर्रफ से फोन पर कहा कि अपनी सेना को कारगिल सेक्टर से जल्दी से हटा दें।
9. 29 जून को भारतीय सेना के सूरवीरों ने टाइगर हिल के पास की दो पोस्ट पर फिर से तिरंगा लहराया। ये पोस्ट भारतीय नजरिए से महत्वपूर्ण थी इसीलिए इसे जल्दी कब्जा किया गया। इन दोनों पोस्ट का नाम है 5060 व 5100।
10. भारतीय सेना ने पाकिस्तान का मनोबल तोड़ कर रख दिया था। 2 जुलाई के दिन भारतीय सेना के जवानों ने कारगिल को तीनों तरफ से घेर लिया। दोनों देशों के तरफ से खूब गोलीबारी, बमबारी हुई। सैनिक भी शहीद हुए। हालांकि अंततः टाइगर हिल पर भारत ने तिरंगा लहराया। भारत ने धीरे-धीरे सभी पोस्टों पर कब्जा जमा लिया और अमेरिका को इस बात की सूचना दी। तत्कालिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने देश की जनता को ऑपरेशन विजय की जीत की जानकारी दी। बाद में जवानों की शहादत को यादगार बनाने के तौर पर 26 जुलाई को हर साल कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाने की घोषणा हुई। तभी से कारगिल विजय दिवस प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता आ रहा है।



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