हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। यदि आप किसी गंभीर समस्या या आप जिसे बहुत प्यार करते हैं कोई गंभीर बीमारी से जन्मजात से ग्रसित है और भविष्य में ठीक होने की कोई आशा नहीं हो तो आपको गंभीरता पूर्वक स्पॉन्टेनियस थेरेपी राइटिंग (एस. टी.डब्ल्यू.) का सहारा ले सकते हैं। यह तकनीक आपके लिये आशा की एक किरण बन सकती है। यही आशा भविष्य में आपका विश्वास बन सकता है। यह विश्वास आपको साक्षात ईश्वर से निकटता को सिद्ध कर सकता है। आपको आशा की नवीन किरण स्पष्ट रूप से दिखाएं पढ़ सकती है। जो कि आपका जीवन बदलने में भी पूर्ण रूप से सक्षम है, यह तकनीक 72 वर्षीय वयोवृद्ध न्यू वेंकूवर कनाडा से आए कवि बाबा नामक व्यक्ति ने विकसित की है। अपना संपूर्ण जीवन नशे की लत में डालने के बावजूद ईश्वर की कृपा से लॉकडाउन से पहले मार्च के महीने में कवि बाबा भारत में ऋषिकेश के तपोवन में ऋषिकेश सदन नामक ध्यान योगा केंद्र पर आए थे। अपने जीवन से घोर निराशा एवं नशे की बुरी आदतों की वजह से कई बार अपना घर छोड़कर अलग-अलग स्थानों पर जाकर अपना संपूर्ण जीवन को शिथिल कर देने वाले कवि बाबा ने जीवन के अंतिम दिनों में ऋषिकेश आकर अपने जीवन के अंतिम दिनों को व्यतीत करने का मन बनाया था। यह सोच कर आए थे कि अब कनाडा वापस नहीं आना है और अपना संपूर्ण जीवन भारतवर्ष में ही बिता कर यहां के लोगों की जितना संभव हो सके सेवा करके अपना भूतकाल का प्रायश्चित कर भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसी क्रम में कवि बाबा ने तपोवन स्थित ऋषिकेश सदन नामक ध्यान योगा केंद्र में विगत 5 महीनों से स्पॉन्टेनियस थेरेपी राइटिंग (एस.टी.डब्ल्यू) को विकसित किया, नित्य प्रतिदिन इस तकनीक का अभ्यास किया। कवि बाबा के अनुसार रोजाना सुबह उठकर अपनी भावनाओं अपनी नकारात्मक विचारों तथा अपना भूतकाल का अनुभव को लगातार का कागज पर नियमित रूप से लिखना लिखने की तकनीक को स्पॉन्टेनियस थेरेपी राइटिंग स्किल्स कहते हैं। यह मनोविज्ञान की एक शाखा होती है जिससे मन मस्तिष्क की अवचेतन मन की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। बशर्ते हमें नियमित रूप से कागज पर इन समस्त नकारात्मक ऊर्जा एवं अपने जीवन का भूतकाल के अनुभव को लिखना होता है। नियमित रूप से अभ्यास में लाकर हम अपने मन मस्तिष्क एवं आत्मा की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को धीरे धीरे कम करके परमपिता परमेश्वर की असीम आशीर्वाद से दूर कर सकते हैं। यह तकनीक ईश्वर द्वारा आध्यात्मिक एवं दिव्य ऊर्जा को हमारे मन मस्तिष्क तथा आत्मा में उत्पन्न कर देती है। जो कि हमारी सारी नकारात्मक भावनाओं को धीरे-धीरे नष्ट करने में सक्षम होती है और एक अवस्था ऐसी आती है जब हम इन सब नकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण रूप से अलग हो जाते हैं। यह लगातार अभ्यास एवं लगातार अभ्यास के द्वारा ही संभव हो पाता है। कवि बाबा के मतानुसार के गुरु योगी अमृत देसाई हैं जो कि भारत वर्ष के गुजरात राज्य से हैं। वर्तमान में वह 85 वर्ष की अवस्था को प्राप्त करके फ्लोरिडा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में रहते हैं। इनकी छवि अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु की है। कवि बाबा ने बताया लगभग अमेरिका में 7 वर्ष तक लगातार योगा करने के बाद सर्वप्रथम 80 और 90 के दशक में उन्हें उनके गुरु योगी अमृत देसाई से सर्वप्रथम मुलाकात भारत में हुई थी। उसके बाद वह कनाडा वापस चला गए थे। उसके बाद 1998 में कुंभ मेला देखने हेतु ऋषिकेश आये और उन्हें लगभग 1 महीने यहां रुकने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उस समय ऋषिकेश और यहां के लोगों के बारे में उन्हें जानने का बड़ा शौक रहा। कभी बाबा ने बताया कि ऋषिकेश वस्तुतः अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विख्यात है, जहां गंगा मां अद्भुत पहाड़ों की श्रंखला एवं घनघोर जंगल का अविस्मरणीय मिलन है जो कि संपूर्ण विश्व में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। कभी बाबा ने बताया कि लगभग 2 वर्ष पहले कनाडा में एक पुस्तक "वंश रेन हैवंस रेन" प्रकाशित की थी। लॉकडाउन के विगत 3 महीनों में उन्होंने एक और पुस्तक "दी लाइट ऑफ ट्रुथ" का एक अंक प्रकाशित कर दिया है जिसमें ही उन्होंने स्पॉन्टेनियस राइटिंग थेरेपी राइटिंग का अपना जीवन तो प्रयोगों का वर्णन किया है। इसी पुस्तक का द्वितीय भाग बहुत जल्दी प्रकाशित होने वाला है। कवि बाबा बहुत खुश होते हुए कहते हैं यह ऋषिकेश उनका अपना घर है और वो यही जीना, मरना चाहते है। यहां उन्हें घर जैसा आंनद मिलता है। ऋषिकेश सदन की प्रबंधक आरती और मेघा बड़थ्वाल ने उनका 5 महीनों से बहुत ध्यान रखा जिसके परिणाम स्वरूप उन्होंने यह तकनीक विकसित करने में सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया। जो कि भारतवर्ष के आने वाली पीढ़ियों को नशे की बुरी आदतों जैसे शराब धूम्रपान एवं अन्य नशों से मुक्त करने के लिए एक प्रभावशाली सिद्ध होगी। कवि बाबा ने बताया कि उन्हें ऋषिकेश में लगभग सभी लोगों ने बहुत प्यार किया और मानवीय दृष्टिकोण से वो आशातीत परिवर्तन का साक्षी बनता चला गया और सारी नकारात्मक ऊर्जा को पॉजिटिव ऊर्जा में परिवर्तित करता चला गया।



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