हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। वेदों की पताकाएं विदेशों में फैलाई जायेंगी। वेदों की ऋचाएं और मंत्रों को विदेशी छात्र एवं छात्राओं को पढ़ाया जायेगा। भारत के ऋषि मुनियों की साधनाओं के बारे में विदेशी शिक्षकोंए छात्रों और शोधार्थियों को बताया जायेगा। भारतीय संस्कृति को विदेशों में पल्लवित करने के लिए वेद के मर्मज्ञ अपना लैक्चर यूरोप के विश्व विद्यालयों में जाकर देंगे। गुरुकुल कांगड़ी विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो० रूपकिशोर शास्त्री ने बताया कि यूरोप की श्रेष्ठतम साइप्रस विश्वविद्यालय के मध्य एमओयू् साईन हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रबन्ध अध्ययन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो० वी०के० सिंह के प्रयास से यह एम०ओ०यू० की प्रक्रिया पूर्ण की गयी है। प्रो० रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि विश्व विद्यालय के सभी विषयों के शिक्षक साइप्रस विश्व विद्यालय में जाकर अपने-अपने विषयों का व्याख्यान देंगे। वेदए दर्शन और संस्कृत के विषयों को विदेशों में पढ़ाया जायेगा। भारतीय संस्कृति को विदेशों में पल्लवित करने का प्रमुख कार्य किया जायेगा। विश्वविद्यालय के शिक्षक साइप्रस विश्वविद्यालय छात्रों को वेदए उपनिषद और पुराणों का ज्ञान देंगे। प्रबन्ध अध्ययन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो० वी०के० सिंह ने बताया कि साइप्रस विश्वविद्यालयए यूरोप के निदेशक और जनसंपर्क अधिकारी से लगातार वार्ता के बाद गुरुकुल कांगड़ी विश्व विद्यालय और साइप्रस विश्व विद्यालय के मध्य छः बिन्दुओं को लेकर परस्पर एक समझौता लिखित में हुआ है। प्रबन्धन के क्षेत्र में विभाग के शिक्षकए शोधार्थी और छात्र साइप्रस विश्वविद्यालय में जाकर अपने ज्ञान की वृद्धि कर सकते हैं। उसी प्रकार से साइप्रस विश्व विद्यालय के छात्रध्छात्राएं गुरुकुल में आकर अलग-अलग विषयों का ज्ञान यहां से अर्जित कर सकेंगे। कोरोना महामारी के पश्चात् साइप्रस विश्वविद्यालय से एक दल गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय आने वाला है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल के अधिकारी और कर्मचारी भी साइप्रस विश्वविद्यालय में जाकर नवीन तकनीकी ज्ञान को सीखने जा सकते हैं। एम०ओ०यू० साईन होने के बाद विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है। इस कार्य की सफलता के लिए विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों ने शुभकामनाएं प्रेषित की है।



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