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(रजत चौहान) हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में आयोजित विशेष ध्यान कक्षा को संबोधित करते हुए कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने नवप्रवेशी व पुरातन छात्र-छात्राओं को ध्यान के व्यावहारिक व सैद्धांतिक पक्षों की विस्तृत जानकारी दी। कुलाधिपति ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को ध्यान के माध्यम से स्थिरता, शांति, उर्द्धगामिता, प्रसन्नता व शीतलता की ओर प्रेरित किया। तो वहीं इसके साथ ही विराट की ओर अग्रसर होने के लिए धारण करने की क्षमता व निकट आने वालों को छाया प्रदान करने हेतु विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से जानकारी दी। डॉ. पण्ड्या ने इस अवसर पर ‘वृक्षों से एकाकार का ध्यान’ में गोता लगवाये। कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने कहा कि पेड़-पौधे न सिर्फ हमें प्राण वायु देते है बल्कि वे हमारे आंतरिक व बाह्य विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। अगर हम उन्हें अपना मित्र बना लें, तो जीवन सुखमय होने लगेगा। उन्होंने कहा कि धरती पर कहीं देवी-देवताओं के दर्शन करने हों, तो वृक्ष-वनस्पतियों में कर सकते हैं। यदि हम इन्हें अपना मित्र बना लें, तो उनके गुण हमारे अंदर शनैः-शनैः विकसित होने लगते हंै। वृक्षों के अंदर मुख्यतः स्थिरता, शांति, उर्द्धगामी, धारण करने की क्षमता, प्रसन्नता, शीतलता व दूसरों को सदैव छाया देना जैसे गुण विद्यमान हैं, इससे पूर्व कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने ‘अपनी राह चला लो गुरुवर....’ गीत से उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर संगीत विभाग के भाइयों ने वायलीन, सितार, बांसुरी के धुन से साथ दिया। इस दौरान कुलाधिपति जी ने विद्यार्थियों के विभिन्न शंकाओं का समाधान भी किया। इस अवसर पर देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन सहित समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं शांतिकुंज व ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। 
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