हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। गीता में कहा गया है कि "कर्म हमारे अधीन है, परिणाम नही" अतः परिणाम की परवाह किए बिना हमें निष्टा भाव से अपने फर्ज के प्रति समर्पित होना चाहिए। कुछ ऐसा ही इन दिनों हरिद्वार ने चल रहे कावंड़ ड्यूटी में चल रहे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ हो रहा हैं। हरिद्वार का कावंड़ मेला प्रशासन के लिये हमेशा से ही चुनोती से भरा होता है। इस बार तो हर बार की अपेक्षा ज्यादा कावड़िये हरिद्वार जल लेने आ चुके हैं। उत्तराखंड स्तर के बड़े पुलिस अधिकारी जैसे कि अशोक कुमार निरन्तर कावड़ियो के बीच जाकर व्यवस्था बनाये रखे हुवे है। हरिद्वार एसएसपी जन्मजेय खंडूरी का भी सभी पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को निर्देश है कि कावंड़ मेले को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु जरा भी कोताही लापरवाही न बरतें। उनके इस दिशा निर्देश को काफी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने गम्भीरता पूर्वक लेते हुवे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। एक सर्वे में पाया गया कि  संवेदनशील स्थल धनपुरा बस स्टेंड पर एस आई ऋषि कुमार शर्मा अपने सहयोगियों कॉन्स्टेबल प्रताप सिंह चौहान, चन्द्र मोहन, राजेश लाल, के साथ मुस्तेदी के साथ ड्यूटी करते पाए गए। 
कावंड़ मेले मे काफी पुरुष और महिला सब इंस्पेक्टर ऐसे भी पाए गए जो ड्यूटी की अपेक्षा मोबाइल में वाट्सअप, फेसबुक में व्यस्त देखे गए। तो वही एस आई ऋषि कुमार शर्मा बजाय अपने सहयोगियों कॉन्स्टेबल के भरोसे न रहते हुवे स्वयं अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने फर्ज को अंजाम देते हुवे पाये गए।  पथरी थाना अंतर्गत कटारपुर चौक जिसकी गिनती उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के सबसे ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र में से है। उसके बावजूद यहाँ ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मीयो का व्यवहार ढुलमूल पाया गया। बजाय आने जाने वाले ट्रैफिक की व्यवस्था बनाये रखने की अपेक्षा वो किसी न किसी दुकान में बैठकर आराम करते या मोबाइल में व्यस्त देखें गये। शायद इसी कारण कल कावड़िये की बाइक से महिला को चोट आई। यह भी देखा गया कि काफी पुलिसकर्मी और अधिकारी मीडिया के साथ तालमेल बैठाकर काम करना अपनी शान के खिलाफ समझते है। जबकि मीडिया और पुलिस विभाग मिलकर कार्य करे तो बडी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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