हरिद्वार की गूंज (24*7)
(निशात क़ुरैशी) देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने एक फतवे में ईद के दिन गले मिलने को बिदअत करार दिया है। ईद से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल किया गया फतवा चर्चा का विषय बन रहा है।
देखें वीडियो: मौलाना कारी इस्हाक़ गोऱा
दारुल उलूम के फतवे का उलेमा ने भी समर्थन किया है पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने दारुल उलूम से लिखित में सवाल पूछा था कि क्या ईद के दिन गले मिलना मोहम्मद साहब के अमल (जीवन में किए गए कार्यों) से साबित है। अगर हमसे कोई गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो क्या उससे गले मिल लेना चाहिए। सवालों के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों की खंडपीठ ने दिए फतवे में स्पष्ट कहा कि खास ईद के दिन एक दूसरे से गले मिलना मोहम्मद साहब और सहाबा किराम से साबित नहीं है। इसलिए बाकायदा ईद के दिन गले मिलने का एहतेमाम करना बिदअत (मोहम्मद साहब के जीवन से हटकर) है। हां अगर किसी से बहुत दिनों बाद इसी दिन मुलाकात हुई हो तो फितरतन मोहब्बत में उससे गले मिलने में कोई हर्ज नहीं है। बशर्त यह कि ईद के दिन गले मिलने को मसनून (सुन्नत) या जरुरी न समझा जाता हो। अगर कोई गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो उसे प्यार से मना कर दिया जाए लेकिन इस बात का खास ख्याल रखा जाए कि लड़ाई झगड़े या फितने की शक्ल पैदा नहीं होनी चाहिए। ईद से ठीक पहले दारुल उलूम का यह फतवा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। उलेमा मौलाना कारी इस्हाक़ गोरा ने दारुल उलूम के फतवे को पूरी तरह सही बताते हुए कहा कि इस्लाम रस्मों के खिलाफ है, और रस्म के तौर पर ईद के दिन गले मिलना बिदअत है। जिसे छोडना जरुरी है।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours