हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। उच्च न्यायालय द्वारा कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए अधिकृत रोगियों के उपचार व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए गठित डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग कमेटी  ने एम्स अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल में कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों के इलाज की कार्यप्रणाली व इसके लिए जुटाई गई तमाम व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए न्यायाधीश ने एम्स के कोविड वार्ड में भर्ती कोरोना ग्रसित मरीजों से वीडियो कॉल के द्वारा संवाद भी किया। संस्थान के कोविड सेंटर में सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल पाए जाने पर टीम  ने संतोष व्यक्त किया।  उनके अनुसार दूसरे अस्पतालों को भी कोविड ग्रसित मरीजों के इलाज में एम्स के स्तर की व्यवस्थाएं जुटाई जानी चाहिए। बुधवार को उच्च न्यायालय द्वारा कोविड सेंटरों की व्यवस्थाओं के लिए गठित जिला निगरानी समिति के सदस्यों ने एम्स का दौरा किया, जहां कमेटी के सदस्यों ने कोरोना ग्रसित मरीजों के लिए उपलब्ध उपचार व्यवस्थाओं को करीब से देखा व इस बाबत विस्तृत जानकारी प्राप्त की। एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने उन्हें बताया कि संस्थान के कोविड सेंटर में कोरोना मरीजों की भर्ती व आईसोलेशन के लिए 400 बेड का स्पेशल सेंटर बनाया गया है। बताया कि एम्स ऋषिकेश देश का पहला मेडिकल संस्थान है जहां कोविड सेंटर में कोरोना वायरस से ग्रसित गंभीर रोगियों के लिए 6 स्पेशल आईसीयू (16 बेड प्रति आईसीयू) बनाए गए हैं।  उन्होंने बताया कि कोविड सेंटर में कोरोना ग्रसित मरीजों के उपचार व निगरानी के लिए 24 घंटे चिकित्सकों की टीमें लगाई गई हैं जो मरीज के स्वास्थ्य पर नजर रखती हैं। निदेशक ने बताया कि एम्स में कोरोना से गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों के लिए प्लाज्मा बैंक बनाया गया है,जिसमें संस्थान के ही कोविड से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हेल्थ केयर वर्कर्स द्वारा प्लाज्मा डोनेट किया जा रहा है। जिससे अब तक 50 मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी दी जा चुकी है। उन्होंने प्लाज्मा डोनेशन में  देहरादून के फोर्सेज के जवानों व हरिद्वार के एनजीओ की भी सराहना की। कमेटी की अगुवाई कर रही सिविल जज अपर डिवीजन व सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नेहा कुशवाहा ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में कोविड मरीजों के उपचार के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कोविड काल में इस स्तर की व्यवस्था को जुटाए जाने को देश के तमाम बड़े अस्पतालों की अपेक्षा अपने आप में बड़ी उपलब्धि बताया। मरीज के तीमारदारों को उनके स्वास्थ्य की जानकारी देने के लिए संवाद हेल्प डेस्क बनाई गई है,जिसके माध्यम से मरीज के अटेंडेंट, परिजन वाट्सएप संदेश व दूरभाष के जरिए चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ से संबंधित मरीज के स्वास्थ्य से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान टीम ने यहां भर्ती कोविड मरीजों से वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा बातचीत की व उनका हाल जाना, साथ ही अस्पताल की व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया, जिसमें मरीजों ने अस्पताल में मिल रहे उपचार व अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि पब्लिक को समझना होगा कि कोरोना खतरनाक वायरस है,लिहाजा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें व मास्क अनिवार्यरूप से लगाएं। उन्होंने कोविड पर जीत दर्ज करा चुके मरीजों से अपील की कि वह अन्य गंभीर बीमार मरीजों की सहायता के लिए प्लाज्मा डोनेट करें, इसके लिए एम्स संस्थान में प्लाज्मा बैंक बनाया गया है।                                                                                             डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि एम्स को​विड सेंटर में भर्ती मरीजों से प्रत्येक सप्ताह टैब के जरिए निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत व वह स्वयं बातचीत करते हैं व उन्हें दिए जा रहे उपचार की जानकारी लेते हैं। इसके साथ ही नियमिततौर पर पेशेंट की स्थिति की जानकारी लेने के लिए रिमोट सेंसिंग डिवाइस की व्यवस्था की गई है।                                                                                                                                                        नोडल अधिकारी को​विड डा. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स ऋषिकेश कोविड का टर्सरी सेंटर है, लिहाजा यहां पर उत्तराखंड व कई अन्य राज्यों से गंभीर मरीजों को लिया जाता है। इस वजह से संभवत एम्स अस्पताल में मृतकों की संख्या भी अधिक हो सकती है। इस अवसर पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, डीन (हॉस्पिटल अफेयर्स) प्रो. यूबी मिश्रा, नोडल ऑफिसर कोविड (प्रशासनिक) डा. मधुर उनियाल, नोडल ऑफिसर कोविड क्लिनिकल डा. प्रसन कुमार पांडा, डॉ विकास पंवार, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, डा. महेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।

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