हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में देशभर के प्रज्ञा संस्थानों के जिला समन्वयक व जोनल प्रभारियों की पाँच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में मप्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, झारखण्ड सहित 22 राज्यों के पाँच सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय जोनल समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा ने कहा कि गायत्री परिवार के संस्थापक पूज्य आचार्यश्री ने देश भर में फैले प्रज्ञा संस्थानों के माध्यम से नारी जागरण, युवा जागरण सहित विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों को गति देने हेतु बनवाया है। अब तक हमारे प्रज्ञा संस्थानों ने इस दिशा में अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन किया है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रचनात्मक व सुधारात्मक कार्यक्रमों को और अधिक गति देनी है। श्री शर्मा ने कहा कि व्यक्तित्व के निर्माण, समर्पण से ही भगवत कृपा प्राप्त होती हैं। विचार क्रांति अभियान के संगठन हेतु योग्यता, अनुभव, प्रशिक्षण एवं कौशल की आवश्यकता होती है और प्रशिक्षण, संगोष्ठी से ही इन गुणों का विकास होता है। श्री शर्मा ने कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा की जानकारी दी। शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि संघबद्ध होकर कार्य करने से बड़े से बड़ा कार्य सहज ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने विविध उदाहरणों के माध्यम से गायत्री परिवार द्वारा किये जा रहे आयोजनों को वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताया। प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री उपाध्याय ने कहा कि आत्म परिष्कार से ही परिवार, समाज व राष्ट्र का निर्माण संभव है। वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री केसरी कपिल ने प्रज्ञा संस्थानों में भी रचनात्मक गतिविधियाँ चलाने व साधना आदि का प्रशिक्षण सत्र चलाने पर बल दिया। शिविर समन्यक के अनुसार इस संगोष्ठी में देश भर के 450 जिलों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। संगोष्ठी में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या सहित अनेक विषय विशेषज्ञ 18 अलग-अलग विषयों पर संबोधित करेंगे।
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