हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। एक भेट के दौरान डॉ आशीष मिश्रा ने पत्रकार को बताया कि उपवास के संम्बध में तमाम तरह की भ्रान्तियाँ समाज में हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार उपवास का अर्थ निराहार रहना होता है, लोग उपवास तो करते हैं परन्तु उपवास के समय क्या खाना चाहिये क्या नहीं यह नहीं जानते, इसलिए उपवास का लाभ उन्हे नहीं मिलता उपवास जितने दिन का हो उतने ही दिन मूंग की दाल का पानी या मूंग का इस्तेमाल करना चाहिए, तत्पश्चात सामान्य भोजन लेने का विधान है, भूखे पेट ली गई, आयुर्वेदिक काष्ठ औषधि अधिक लाभ दायक होती है, उपवास काल में शरीर में नया मल उत्पन्न नहीं होता तथा जीवनशक्ति को पुराना जमा मल निकालने का अवसर मिलता है, साथ मलशुध्दि से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। एक भेट के दौरान डॉ आशीष मिश्रा ने पत्रकार को बताया कि उपवास के संम्बध में तमाम तरह की भ्रान्तियाँ समाज में हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार उपवास का अर्थ निराहार रहना होता है, लोग उपवास तो करते हैं परन्तु उपवास के समय क्या खाना चाहिये क्या नहीं यह नहीं जानते, इसलिए उपवास का लाभ उन्हे नहीं मिलता उपवास जितने दिन का हो उतने ही दिन मूंग की दाल का पानी या मूंग का इस्तेमाल करना चाहिए, तत्पश्चात सामान्य भोजन लेने का विधान है, भूखे पेट ली गई, आयुर्वेदिक काष्ठ औषधि अधिक लाभ दायक होती है, उपवास काल में शरीर में नया मल उत्पन्न नहीं होता तथा जीवनशक्ति को पुराना जमा मल निकालने का अवसर मिलता है, साथ मलशुध्दि से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।



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