हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस की शुभ बेला पर जगह-जगह मिठाई बाँटना व तिरंगे के सलामी देने के साथ-साथ रंगा रंग कार्यक्रमों में सभी लोग आनंद का अनुभव करेंगे, करना भी चाहिए क्यों कि आज के दिन हम आजाद ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से हमें आजादी मिली थी, वैसे खुशी का इजहार तो हम कई मौकों पर करते हैं त्योहारों पर, जन्मदिन पर, प्रत्यासी के विजयी होने पर लेकिन यह खुशी देश के लिए एक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि अंग्रेजों से हमें आजादी मिली थी तो खुश होना स्वाभाविक है परन्तु जरा सोच कर देखिये कि जिस खुशी के पीछे तमाम मातायें अपने बच्चों से बिछुड़ गयी तमाम घरों में मातम छा गया जमीन लहू से लाल हो गयी हंसते हंसते क्रान्तिकारी लोग फाँसी पर चढ़ गये क्या इस बात पर हमारी आँखे उनके लिए नम नहीं हो सकती यदि नहीं तो वास्तव हम आप खुदगर्ज हैं क्योंकि हमारी आजादी के लिए ही तो उन्होने अपने प्राणों का बलिदान दिया तो क्या हम उनकी याद ना करके मिठाई बाँटे, या फिर उन भारत के वीर सपूतों की याद में हम राष्ट्रहित में एक एक दीप अपने घरों प्रज्वलित करें व उन्हें अन्तर्मन से श्रध्दाँजली दे, तभी हम सच्चे व वफादार भारतीय कहलाने के लायक होंगे, जब फिरंगियो को तमाम कोशिशों के बाद लाचार होना पड़ा व झाँसी के किले में दाखिल ना हो सके तो जानते हैं आप क्या हुआ था झाँसी की रानी के एक वफादार सैनिक ने फिरंगियो का साथ देते हुये किले का गेट रात्रि में खोल दिया ऐसे गद्दारों की हमारे देश में उस समय भी कमी नहीं थी परन्तु भारत माँ ने भी ऐसे-ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया था जिन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये, यह देश वीर भगत सिंह जी का है यह देश महाराणा प्रताप जी का है यह देश सुभाष चंद्र बोस जी का है हमारे देश में शूरवीरों की कमी नहीं रही ना है, परन्तु हम सब को उनकी शहादत भूलने की भूल नहीं करनी चाहिए शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरष मेले वतन पर मिटने वालों का यही बाँकी निशा होगा, व मेरा अनुरोध सोभी देश वासियों से यही है कि गणतंत्र दिवस पर खुशी के साथ शाम को अमर शहीदों की याद में एक एक दीपक अपने घरों में अवस्य जलाकर उन्हे सच्ची श्रध्दाँजली दें, कुछ याद उन्हे भी कर लो जो लौट के घर ना आये।
जय हिंद जय भारत
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours