हरिद्वार की गूंज (234*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। त्यौहार के दिन जब शहर में हर कोई शॉपिंग करने अपने अपने वाहन लेकर निकलता है, तो मित्र पुलिस के सूझ बूझ के ही कारण हम सभी अपनी अपनी मंजिल तक पहुँच पाते हैं। यदि ये न हो तो सभी एक दूसरे से पहले निकलने की होड़ में जाम लगा देते हैं। जिससे सभी दुविधा में फस जाते हैं। गाड़ी में बैठा हर चालक यही सोचता है कि सड़क जाम उसके अलावा अन्यो वाहन के ही कारण लगा है, बस स्वयं सही है बाकी गलत है। भले ही वह अपनी लाइन से बाहर निकल कर दूसरे की लाइन में हो। वाहन चालकों की मानसकिता तो देखो कि बस 2 मिनट के लिए ही तो नो पार्किग में गाड़ी खड़ी की है। भले ही उसके वाहन के कारण कितने ही आने जाने वाले वाहनों को कितनी भी असुविधा क्यो न हो रही हो। ऐसे में काम आती है काली वर्दी वाले सी पी यू। जैसे कि वही घिसे पिटे बहानो को लेकर सीपीयू कर्मियों को मनाने की कोशिश में लगे मगर तब तक पुराने रानीपुर मोड़ पर सीपीयू वालो ने कार का चालान काट कर उनके5 वायपर पर लगा दिया था। यदि सभी वाहन चालक मित्र पुलिस के कार्यो में यातायात के नियमो का पालन करते हुवे उनको सहयोग करे, तो उनका तो काम आसान होगा ही साथ ही साथ सभी राहगीर भी अपनी अपनी मंजिल जल्दी पहुँच पायेगे। क्योकि जब भी कोई कही सड़क जाम लगता है तो सभी को पुलिस की ही याद आती है। सभी वाहन चालक पुलिस की मौजूदगी के बिना यातायात के नियमों का पालन करते ही नही।
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