हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। पिछले कई दिनों से महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार एवं छेड़छाड़ जैसे कुकृत्यों पर हुई एक चर्चा के दौरान हरिद्वार निवासी (देवांश शर्मा)एवं दिल्ली निवासी (श्रेष्ठा गुप्ता) अपने एक उदबोधन में नारी शक्ति को मजबूत करते हुए कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब नारी को सुरक्षित एवं सशक्त बनाया जाएगा, आज के युग मे महिलाएं पुरुषो के कंधे से कंधा मिलाकर प्रत्येक कार्य भूमि में अपनी सेवाएं दे रही है फिर चाहे वो राजनैतिक भूमि हो, विज्ञान भूमि हो या देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा कोई कार्यक्षेत्र हो, इस देश का विकास तभी संभव है जब इस देश मे नारी अपने आप को शशक्त एवं सुरक्षित मेहसूस करेगी, भ्रूण हत्या बाल विवाह की शिकार हुई है नारिया, घरेलू हिंसा, ताना-बाना, सह रही है नारिया, बहुत सहा है अपमान औऱ बहुत सही है गालिया अजीबो गरीब दास प्रथा की, शिकार हुई है नारिया। लक्ष्मी देवी दुर्गा देवी, मीरा बन रही है नारिया, आगे बढने की लड़ाई को खामोशी से लड़ रही नारिया। ऐसा कोई क्षेत्र नही ,जहा नही पहुची नारिया, गगन चुम्बी उचाईयों को छू रही है नारिया, बंधनो के काले कोहरे को हटा, अब उड़ान भर रही नारिया देश की सीमा हो या अंतरिक्ष सब जगह पहुच रही नारिया, गलत फहमी को दूर हटाओ अब शशक्त हुई है नारिया पहले जैसे अबला नही अब रही है नारिया।
(रजत चौहान) हरिद्वार। पिछले कई दिनों से महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार एवं छेड़छाड़ जैसे कुकृत्यों पर हुई एक चर्चा के दौरान हरिद्वार निवासी (देवांश शर्मा)एवं दिल्ली निवासी (श्रेष्ठा गुप्ता) अपने एक उदबोधन में नारी शक्ति को मजबूत करते हुए कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब नारी को सुरक्षित एवं सशक्त बनाया जाएगा, आज के युग मे महिलाएं पुरुषो के कंधे से कंधा मिलाकर प्रत्येक कार्य भूमि में अपनी सेवाएं दे रही है फिर चाहे वो राजनैतिक भूमि हो, विज्ञान भूमि हो या देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा कोई कार्यक्षेत्र हो, इस देश का विकास तभी संभव है जब इस देश मे नारी अपने आप को शशक्त एवं सुरक्षित मेहसूस करेगी, भ्रूण हत्या बाल विवाह की शिकार हुई है नारिया, घरेलू हिंसा, ताना-बाना, सह रही है नारिया, बहुत सहा है अपमान औऱ बहुत सही है गालिया अजीबो गरीब दास प्रथा की, शिकार हुई है नारिया। लक्ष्मी देवी दुर्गा देवी, मीरा बन रही है नारिया, आगे बढने की लड़ाई को खामोशी से लड़ रही नारिया। ऐसा कोई क्षेत्र नही ,जहा नही पहुची नारिया, गगन चुम्बी उचाईयों को छू रही है नारिया, बंधनो के काले कोहरे को हटा, अब उड़ान भर रही नारिया देश की सीमा हो या अंतरिक्ष सब जगह पहुच रही नारिया, गलत फहमी को दूर हटाओ अब शशक्त हुई है नारिया पहले जैसे अबला नही अब रही है नारिया।



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