हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान) हरिद्वार। क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत तरुण सागर जी महाराज का महाप्रयाण पूरी मानवता के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी कमी पूरी नहीं की जा सकती। वे समाज को कड़वे प्रवचन के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाते थे। उन्हें सभी विचारशील लोग  आदर के साथ सुनते थे। अगस्त ख्0क्फ् में जयपुर में उनसे मिलने का सुअवसर पर मिला, जब उनके स्वहस्त से तरुणक्रांति पुरस्कार से मुझे नवाजा था। उनके साथ बिताए हुए क्षणों की स्मृति आज भी मेरे दिल में वैसी ही है। वियोग की इस दुःखद घड़ी मैं यही श्रद्धांजलि दे सकता हूँ कि उनके दिखाये मार्ग और बचे कार्य में जो सहयोग गायत्री परिवार कर सकता है, वह सतत करता रहेगा। 

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