हरिद्वार की गूंज (24*7)

"ये जो इन रक्तवीरो के चेहरे पर मुस्कान है, इन्हें पता है कि इनके रक्त में बसी दूसरों की जान है"

(गगन शर्मा) हरिद्वार। जी हाँ जहां विज्ञान के इस युग मे अब भी काफी लोग विभिन्न कारणों से रक्तदान करना उचित नही समझते तो हमारे ही समाज मे ऐसे भी काफी युवा है जिन्हें यदि रात में भी पता चल जाए कि किसी जरूरतमंद को रक्त चाहिए तो फिर ये युवा न दूरी की परवाह करते न ही मौसम देखते, न ही उसकी जाति, धर्म देखते। देखते हैं तो सिर्फ इतना कि उनके प्रयासों से उस रोगी को जीवन बच जाए। इन्ही क्रम में टीम ब्लड वोलियन्टीयर्स,हरिद्वार के विशाल अनेजा जी और अनिल अरोड़ा के माध्यम जब कुशल धीमान और मनीष मैसन को जानकारी मिली कि एक गर्भवती स्त्री को ऑप्रेशन के समय अतिदुर्लभ  ए बी नेगेटिव रक्त की जरूरत है तो इन दोनों युवाओ ने भारी उत्साह के साथ रक्त दान कर अपना मानवता का फर्ज निभाया। दोनों रक्तदानी बिना समय गवांए ब्लड बैंक पहुंचे और महादान किया। टीम के सदस्य तुषार गाबा ने भी नजीबाबाद के एक  गंभीर मरीज के लिये A- प्लेटलेट्स के जम्बो पैक का दान कर जीवन बचाने में अपना सहयोग दिया। समाजसेवी अनिल अरोड़ा ने आम जनता को सन्देश देते हुवे कहा कि रक्तदान करने से कोई किसी तरह की कमजोरी नही आती है बल्कि हमे अपने रक्त समूह, हीमोग्लोबिन और भविष्य में होने वाले रोगों के बारे में पहले से जानकारी हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि जिस किसी का वजन 45 किलो से ऊपर और रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 से ज्यादा है वह रक्त दान कर सकता है। बेशर्ते उसकी पहले से कोई दवाई न चल रही हो और  कोरोना की वैक्सिन लगवाए हुए 14 दिन से अधिक हो गये हों।

Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours