हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति मुख्यालय हरिद्वार एवं भारत विकास परिषद मंदाकिनी शाखा हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में "जनसंख्या की समस्या" विषय पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति मुख्यालय हरिद्वार एवं भारत विकास परिषद मंदाकिनी शाखा हरिद्वार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुये कहा कि जनसंख्या नियंत्रण पर पहले भारत में चर्चा भी नहीं की गई। जनसंख्या नियंत्रण कानून आने से पहले भारत में पलायन करके तथा बँटवारे के बाद आए लोगों से भारत में जनसंख्या की बढ़ोतरी हुई। एक जनवरी 2020 को भारत में जहां 67 हज़ार 385 बच्चों का जन्म हुआ है, वहीं चीन में इस दिन 46 हज़ार 299 बच्चों का जन्म हुआ, भारत जनसंख्या के मामले में भारत चीन से आगे बढ़ रहा है, देश में बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर इसे नियंत्रित करने के कानून की मांग समय-समय पर उठती रही है। उन्होने कहा यह कानून किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नही है, यह देश की जरूरत है। देश में संचालित सभी संस्थाओं को इसमे पहल करनी चाहिए। स्कूल, कालेजों में इस प्रकार के डिबेट कर जागरूकता अभियान चलाया जाना आवश्यक है, जिससे आने वाली पीढ़ी जागरूक हो सके। देश की बहुत सारी समस्याओं की मुख्य वजह जनसंख्या है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रूपकिशोरशास्त्री ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि भारत की 1951 की जनगणना 1871 के बाद से हर दशक में भारत में आयोजित सेंसस की श्रृंखला में 9वीं थी। आजादी और भारत का विभाजन के बाद यह पहली जनगणना भी है। उस समय जनसंख्या नियंत्रण कानून आया। इस पर नियंत्रण होना चाहिए था, यह एक विस्फोटक स्थिति है समाज के भी और राष्ट्र की भी जो उत्तर प्रदेश सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लाई है जो सख्ती से लेकर आई है जो उसको धरातल पर उतरना चाहती है, यह देश हित ही नहीं मानव जाति, पशु पक्षी, वन्य जीव इत्यादि सभी के लिए लाभकारी है, यह किसी मजहब विशेष से नहीं जुड़ा हुआ है। कोरोना काल नें सरकार को जो कष्ट का सामना करना पड़ा है अगर जनसंख्या कम होती तो सरकार को कष्टों का सामना नही करना पड़ता। कोरोना काल में अस्पतालों में आक्सीजन, बेड इत्यादि की आवश्यकता पड़ी, जो मोदी, योगी कर रहे है भविष्य में यह देश के लिए हितकर होगा। पीजी कॉलेज अमरोहा के प्रो अशोक कुमार आर्य ने कहा कि स्वतन्त्रता की प्राप्ति के समय जनसंख्या 33 करोड़ थी, आजादी के प्रथम 5 दशक में 100 करोड़ को पार करके रिकार्ड स्थापित किया। अब यह 145 करोड़ होने जा रही है, भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से 2.5 प्रतिशत है इसके हिसाब से भारत की जनसंख्या 17 करोड़ होनी चाहिए थी जो कि बहुत अधिक है। अगले 30 वर्षों में भारत की जनसंख्या 200 करोड़ हो जाएगी जो विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या में अग्रणी होगा। कम आयु में विवाह, निम्न साक्षरता, परिवार नियोजन के प्रति विमुखता, गरीबी और जनसंख्या विरोधाभास आदि ने जनसंख्या बढ़ाने में योगदान किया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंजीनियर मधुसूदन आर्य ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं का शैक्षिक स्तर और जागरुकता बढ़ाने की कोशिश करनी पड़ेगी। भारत में बढ़ती आबादी गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि सरकार ने इस पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ कदम उठाए हैं लेकिन ये नियंत्रण पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। इस मुद्दे को रोकने के लिए कई अन्य उपाय किए जाने की आवश्यकता है। भारत विकास परिषद मंदाकिनी शाखा के अध्यक्ष रोटेरियन राजीव राय ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होने कहा लोगों को आबादी नियंत्रित करने के महत्व को समझना चाहिए। यह न केवल उन्हें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तथा बेहतर जीवन स्तर प्रदान करेगा बल्कि अपने देश के समग्र विकास में भी मदद करेगा। डॉक्टर सपना बंसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा कि भारत में कानून का सहारा लेने के बजाय जागरूकता अभियान, शिक्षा के स्तर को बढ़ाकर तथा गरीबी को समाप्त करने जैसे उपाय करके जनसंख्या नियंत्रण के लिये प्रयास करने चाहिये। परिवार नियोजन से जुड़े परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये तथा ऐसे परिवार जिन्होंने परिवार नियोजन को नहीं अपनाया है उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से परिवार नियोजन हेतु प्रेरित करना चाईए। इस अवसर पर जगदीश लाल पाहवा, तोष जैन, लायन एस आर गुप्ता, डॉ शिवि अग्रवाल, डॉ त्रिलोक माथुर, नानक चन्द्र गोयल, अनिल कंसल, शोभा शर्मा, शांति स्वरूप गुप्ता, अर्चना सिंघल, अन्नपूर्णा बंधुनी, कुलदीप, जितेंद्र कुमार शर्मा, हेमंत सिंह नेगी, रेखा नेगी, नूपुर पाल, प्रीति जोशी, नीलम रावत, डॉ पंकज कौशिक, विमल गर्ग, प्रवीण अग्रवाल इत्यादि उपस्थित रहे। वेबिनार का संचालन डॉक्टर सपना बंसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने किया।
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