हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। आज ट्रेवल एसोसिएशन की एक बैठक एसोसिएशन के संरक्षक भगवत शर्मा की अध्यक्षता में मकरवाहिनी ट्रेवल्स पर आहूत की गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश पालीवाल ने कहा कि कोर्ट द्वारा चारधाम यात्रा पर रोक लगने से पर्यटन व्यवसायी के लिए चिंता का विषय है हम कोर्ट का सम्मान करते हैं पर सरकार द्वारा पूर्व में ही अगर सही पैरवी की गई होती व कोविड नियमों के अनुसार व एक दिन कुछ सौ लोगो को ही चारधाम के दर्शन की बात रखते हुए योजना बनाई जाती तो शायद आज चारधाम यात्रा भी खुली होती लेकिन उत्तराखण्ड सरकार द्वारा सही पैरवी नही करने का खामियाजा उत्तराखंड के समस्त पर्यटन से जुड़े व्यवसायी को सहना पड़ रहा है जल्द ही सरकार को नीति बना कर यात्रा खोलने को लेकर मजबूत पैरवी करनी चाहिए अन्यथा एसोसिएशन सड़क से सदन तक बड़ा आंदोलन सरकार के खिलाफ करेगी। एसोसिएशन के महामंत्री सुमित श्रीकुंज ने कहा कि सितंबर 2019 में रेलवे का कार्य शुरू हुआ जिस कारण रेल यातयात बाधित रहा व उत्तराखंड हरिद्वार में पर्यटकों का आना बंद हो गया था उसके बाद से कोरोना महामारी के कारण चारधाम यात्रा बन्द रही अब लगभग दो साल होने जा रहे है हमारी काफी गाड़ियां दो साल से एक ही जगह खड़ी है ट्रेवल व्यवसायी बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिसके आगे आज रोजी रोटी का संकट खड़ा हुआ है सरकार ने कुछ लोगो को राहत राशि देने की बात कही है जो भी अभी तक नही मिली सरकार को सभी व्यवसायियों के बारे में सोचना चाहिए हम सरकार से मांग करते है के तत्काल सरकार दो वर्ष का सभी गाड़ियों का टैक्स माफ करे व गाड़ियों के दो साल के इंश्योरेंस में 50% कई छूट दे जिसका लाभ सभी छोटे बड़े व्यवसायी तक पहुचेगा इसके साथ ही सरकार को चारधाम यात्रा को चलाने पर विचार कर मजबूती से पर्यटन व्यवसायियों का पक्ष कोर्ट में रखना चाहिए ताकि व्यवसायियों को कुछ राहत मिल सके। संरक्षक भगवत शर्मा ने कहा कि सरकार को पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों के साथ ही उन गरीब चालको के विषय मे भी विचार करना चाहिए अभी तक सरकार द्वारा कोई राहत नही दी गयी है आज कई चालक भुखमरी की कगार पर है व हरिद्वार उत्तराखंड से पलायन करने पर मजबूर है सरकार को अविलंब इनकी सहायता करनी चाहिए। बैठक में गोपाल छिब्बर, आशीष पंथ, दीपक धनवानी, निर्मल ढिल्लन , सूरज शर्मा, उमेश गॉड, अभिनव शर्मा , विवेक गुप्ता, सचिन पराशर आदि उपस्थित रहे।
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