हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। राष्ट्रीय पत्रकार यूनियन (रजि0) के प्रदेश महामंत्री एवं वरिष्ठ पत्रकार विकास गर्ग ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि जैसे देश के अंदर कोरोना महामारी का रूप ले चुका है उत्तराखंड भी उससे अछूता नहीं है। वहीं सूचना एवं लोक संपर्क विभाग पत्रकारों की अनदेखी कर रहा है। लघु समाचार पत्रों को हाशिए पर लाने का प्रयास किया जा रहा है  जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत  पत्रकारों के हितों की बात कर रहे हैं तो वहीं सूचना विभाग उनकी कार्य योजनाओं पर पलीता लगाने का प्रयास कर रहा है। श्री गर्ग ने कहा मुख्यमंत्री उत्तराखंड तीरथ सिंह रावत व सूचना डीजी रणवीर सिंह चौहान से मांग की है कि लघु समाचार पत्रों को इस कोरोना काल में लघु समाचार पत्रों को कम से कम 10 पेज का विज्ञापन जारी करें। क्योंकि इस समय पत्रकार आर्थिक संकट से जूझ रहा है पत्रकार का भी परिवार है और पत्रकार का भी पेट है वही देखने में आया है कि बड़े समाचार पत्रों को दिन प्रतिदिन करोड़ो का विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं  वही लघु समाचार पत्रों को हाशिए पर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त DG रणबीर सिंह चौहान से ऐसी उम्मीद नहीं थी उन्हें विश्वास था कि रणवीर सिंह चौहान के आने से विभाग में कुछ बदलाव होंगे, लघु समाचार पत्रों का ध्यान रखा जाएगा। लघु समाचार पत्रों के भी मान सम्मान को देखा जाएगा, लेकिन रणवीर सिंह चौहान को भी  पद ग्रहण किए 2 माह से अधिक हो चुके हैं लेकिन आज तक उनके द्वारा भी लघु समाचार पत्रों के प्रति कोई सकारात्मक रवैया नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने पुनः एक सूत्रीय मांग की है कि लघु समाचार पत्रों को कम से कम 10 पेज का विज्ञापन दिया जाए  इसमें लघु समाचार पत्र दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक पत्रों को 10 पृष्ठ का विज्ञापन जारी किया जाए। पत्रकार विकास गर्ग ने कहा बड़े समाचार पत्रों को तो करोड़ो- करोड़ो के विज्ञापन भर भर कर दिए जा रहे हैं लेकिन लघु समाचार पत्रों को एक रणनीति के तहत दरकिनार किया जा रहा है इतिहास गवाह है जब-जब लघु समाचार पत्रों को  हासिये पर रखा गया है तब तक एक नई क्रांति आई है। प्रदेश के मुखिया को यहां एक बात और सोचनी चाहिए भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री उन्होंने कहा था उनकी हार का कारण सूचना विभाग है। इसलिए मुख्यमंत्री को स्वयं संज्ञान लेना होगा क्योंकि मुख्यमंत्री सूचना मंत्री भी हैं इसीलिए उन्हें लघु समाचार पत्रों की ओर भी ध्यान देना होगा। ओर शीघ्र ही लघु समाचार पत्रों को कम से कम 10 पृष्ठ का विज्ञापन जारी करना चाहिए।

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