हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जेड०ए० सलमानी के नाम से जानें जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार जुल्फिकार सलमानी का बीमारी के चलते पिछले वर्ष 26 अप्रैल 2020 को निधन हो गया था। उनके निधन के एक वर्ष पूरे होने पर उनके परिवार व समाज के लोगों ने दरगाह घड़ी वाले बाबा पर उनके नाम की फूल व चादर पेश कर उनको याद किया। ओर दरगाह पर उनके नाम की चादर पेश कर उनकी मगफिरत के लिए दुआ भी की गई है। उनकी कब्र पर उनके चाहने वालों का ताता लगा रहा, लोगों ने उनकी कब्र पर दरूद शरीफ पढ़कर उनकी मगफिरत की दुआएं मांगी और कब्र पर फूल भी चड़ाए। बताते चलें हरिद्वार में क्राइम रिपोर्टर की नींव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार जुल्फिकार अली सलमानी (जेड.ए. सलमानी) उन्होंने चिंगारी अखबार से पत्रकारिता शुरू की थी। उसके बाद वह आखरी पल तक दैनिक जागरण से जुड़े रहे। उनके निधन से पहले उन्हें उत्तराखंड में सलमानी समाज का अध्यक्ष भी चुना गया था। पिछले वर्ष लॉकडाउन में लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने और घरों में रहने की प्रेरित करने की पुलिस के साथ अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। जेड.ए सलमानी सिर्फ पत्रकार ही नहीं बल्कि समाज के गरीब तबको के उत्थान के लिए हमेशा सक्रिय रहने वाले इंसाफ पसंद इंसान थे। और समाज सेवी भी थे उन्होंने हमेशा अपनी कलम से गरीबों को न्याय दिलाने का काम किया है। जेड.ए. सलमानी का इस दुनिया से चले जाने का उनके परिवार और समाज के लोगों पर गहरा असर पड़ा है। परिवार व समाज के लोगो को उनके ना होने की कमी का एहसास होता रहता है। उनके बड़े भाई गफ्फार सलमानी व मुख्तियार सलमानी ने बताया कि जुल्फिकार अली सलमानी हमारे सबसे छोटे भाई थे। पर हम उनकी काबिलत से उनको घर में सबसे बड़ा मानते थे। ओर हम ही नही शहर के सभी लोग उनकी तारीफ़ करते थकते नहीं है। वह आधी रात को भी लोगो की मदद के लिए तैयार रहते थे। दरगाह पर चादर पेश करते हाजी अब्दुल वहीद, गफ्फार सलमानी, नसीम सलमानी, मुख्तियार सलमानी, अमजद, असलम नेक ख्याल मंसूरी, शहादा, नदीम, शाहनवाज, सरफराज, अब्दुल करीम आदि लोग मौजूद रहे।
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