हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(विभास सिन्हा) हरिद्वार। पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 72 वीं गोष्ठी में बसंत का स्वागत "बैरी बसंत" के रूप में पूर्व वर्षों की भांति आभासी मंच पर सम्पन्न हुआ। इस सुगंधित काव्य संध्या में बसंत ऋतु की विभिन्न प्रकृतिक छटाओं को बिखेरती कवितायें – गीत व दोहे पढे गए। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि लेखक विष्णु सक्सेना ने की, मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात गजलकार दोहकार हरेराम समीप रहे। औ। संचालन अवधि कवि अवधेश सिंह ने किया। अन्य पधारे रचनाकारों में विशिष्ट उपस्थित मुंबई की कवयित्री सत्यवती मौर्य की रही इस के अतिरिक्त कथाकार कवि सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा, कवि अनिल मिश्र व कवयित्री पूनम कुमारी ने कवितायें पढ़ीं। हरेराम समीप ने बसंत को अनुभूतियों से जोड़ते हुए चुनिन्दा दोहे पढे “तू भी यदि कविता हवा, हो जाएगी मौन। फिर खुशबू के सफर पर, साथ चलेगा कौन, आज अचानक कर गया, बेटा बचपन पार। निकली उसकी जेब से, चिट्ठी खुशबू दार। तुम्हें देख कर आ गया, मुझे बहुत कुछ याद। गहनों का बक्सा खुला, बड़े दिनों के बाद। विष्णु सक्सेना ने पढ़ा “मन मंदिर में बसंत लाएँ, बसंत में हम रम रम जाए, हर ओर बहें संदली हवाएँ। इसी को आगे बढ़ाते हुए मुंबई से पधारी सत्यवती मौर्य ने कविता पढ़ी “हाँ वसन्त ऋतु आई है, हाँ वसन्त ऋतु आई है। कानन -आँगन के वृक्षों ने तज के अपने पीत वसन, नव पल्लव की कर दी जैसे जग में मुँह दिखाई है। संयोजक कवि अवधेश सिंह ने “बैरी बसंत” को वर्तमान से जोड़ते हुए कहा “बसंत है आज उदास आसमान है राज छुपाए, ओस नहीं आँसू टपकाए, खेतों में फूली ये सरसों, खलिहानों से ये बतलाये, फसलों के आंगन अब तो, आना भूल गया उल्लास, बसंत है आज उदास। इसी क्रम में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने प्रेम संवाद पर कविता पढ़ी “मैं तुमसे बहुत कम बात करती हूँ, पर जब भी करती हूँ, उसमें पहल तुम्हारी ही होती है ”। कवियत्री पूनम कुमारी ने कहा - मेरी तलखियत के साये में एक मासूम सी नदी बहती है, नमीं उसकी आँखों में नही मेरे दिल में रहती है” अनिल मिश्र ने कहा “हो न कभी खुशियों का अंत, जब तक आता रहे बसंत, योगी ऋषि मुनि और यती-संत, तन मन भूले सुमिरे बसंत। तकनीकी कारणो से वरिष्ठ कवि कन्हैया लाल खरे, शीतल बाजप, शशि किरण व प्रियंका सैनी शामिल न हो सके। फेसबुक मंच के सजीव प्रसारण को 42 मित्र दर्शकों ने सराहा, 31 टिप्पणियाँ मिलीं और 2 मित्रों ने इसे समूह साझा किया। जिसमें प्रमुख रूप से परिंदे पत्रिका से टी पी चौबे, कपिल नागर, संजय मिश्र, निधि राज, मनमोहन गुप्त, यासमीन मामल, अनीता सिंह, गायत्री नीमा आदि रहे।
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