हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी भुवनेश्वरी घिल्डियाल का निधन विगत 22 मार्च सोमवार के दिन हो गया। वह 98 साल की थी। कुछ दिनों से वह बीमार चल रही थी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी भुवनेश्वरी घिल्डियाल का नाम उन चुनिंदा राज्य आंदोलनकारियों में आता है जिन्होंने राज्य निर्माण हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया था। उनके निधन से संपूर्ण राज्य में आंदोलनकारियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोमवार शाम करीब 4:00 बजे उन्होंने अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को हरिद्वार में किया गया। भुवनेश्वरी घिल्डियाल उन महिला राज्य आंदोलनकारियों में से एक थी जिन्होंने वर्ष 1994 से राज्य आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहकर महिलाओं का नेतृत्व किया था। देहरादून के जोहड़ी गांव के निकट से नवला निवासी भुवनेश्वरी घिल्डियाल पत्नी स्वर्गीय ईश्वरी दत्त घिल्डियाल की पहचान निडर साहसी व्यवहार कुशल और मददगार नेत्री के रूप में होती थी। आंदोलन के दौरान उनका पूरा परिवार और उनका घर आंदोलनकारियों के विभिन्न प्रकार की सेवाओं के लिए मुख्य अड्डा बना रहता था। वहां बड़े पैमाने पर खाना बनाने से लेकर भावी रणनीति बनाने पर चर्चाओं का दौर गर्म रहता था। उन्हें उसी दौर में जेल की यात्रा भी करनी पड़ती थी। जेल यात्रा के बाद उनके हौसले और भी अधिक बढ़ गए थे। उन्हें राज्य गठन में प्रमुख भूमिका के लिए राज्य सरकार की ओर से अंतिम समय तक पेंशन भी प्रदान की जाती रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री श्री भुवन चंद्र खंडूरी ने उन्हें उत्तराखंड आंदोलनकारी होने के नाते विशेष सम्मान से भी नवाजा था। उनके निधन की सूचना से उनके सभी प्रिय जनों और उत्तराखंड आंदोलनकारियों के बीच शोक की लहर व्याप्त है। आज के उत्तराखंड की दशा और राजनीतिक हालात पर वे चिंतित रहती थी और एक और आंदोलन की जरूरत महसूस करती थी। कुछ समय पूर्व तक अखबारों के जरिए वर्तमान हालात से फिर से लड़ने की इच्छा थी लेकिन अब शरीर साथ देने से मना कर चुका था। वे अपने चार पुत्रों व एक पुत्री का भरा पूरा परिवार में पोते पोतियो हुआ उनके बेटे बेटियों एवं उत्तराखंड के अनेकों प्रिय जनों को अपने स्नेहबंधन के साथ बांधकर इस दुनिया से विदा ले गई उन विराम उनके एक पुत्र राजकीय चिकित्सक अतिरिक्त निदेशक दूसरे व तीसरे पुत्र राजकीय लेक्चरर तथा चौथे पुत्र भी राजकीय चिकित्सा के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके दामाद ओएनजीसी से बहुत पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सभी पुत्रों व पुत्री के सभी बच्चे भी अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

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