हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। 18 जनवरी से 17 फरवरी तक पुलिस प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाया जा रहा है। जिसके लिये यातायात निरक्षक बिपेंद्र सिंह द्वारा सिडकुल कम्पनियों और शिक्षण संस्थानों में वाहन चालकों को यातायात के नियमो के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास भी किया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिये प्रचार प्रसार में खूब फ्लेक्स आदि भी लगाए गए। इतना सब कुछ करने के बावजूद वाहन चलाने वाले दो पहिया या अन्य किसी भी प्रकार के वाहन चालक की मानसिकता में कोई सुधार देखने को नही मिला। जिसके परिणामस्वरूप लक्सर में गन्नो का ओवरलोड ट्रक कई बाइक और चाउमीन ठेली पर पलट गया। ईश्वर की कृपया कोई घायल नही हुवा मगर इतना सन्देश तो दे गया कि सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाओ या माह, मगर जिन वाहन चालक स्वयं को खतरों का खिलाड़ी मानकर वाहन चलाने की आदत बन गयी है। ऐसी आदतों में सुधार के बिना सड़को पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को चाहिए कि सड़क सुरक्षा और यातायात के नियमो को पाठ्यक्रम मे शामिल करें। ताकि अभिभावकों को अपनी आंखों के सामने उनके बच्चों की सड़क दुर्घटनाओं में असमय मौत न देखनी पड़े। ज्वालापुर का अवधुत मण्डल जहाँ ऑटो वाले सड़क पर सफेद पट्टी के अंदर ही सड़क के बीच मे खड़े होकर यात्रियों की प्रतीक्षा करते हैं। यात्री उतारने या चढ़ाने से पूर्व वाहन को सुरक्षित सड़क पर सफेद पट्टी से नीचे न उतारना गैर जिम्मेदारी है। सड़क सुरक्षा माह को असफल बनाने के लिये ऐसे गैर जिम्मेदार वाहन चालकों पर कड़ी कार्यवाही के बिना दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल है। पुलिस विभाग से ही अनेक उदाहरण इसी सड़क सुरक्षा माह में देखने को मिले हैं जब एक बाइक पर बिना हेलमेट तीन सवारी जाते दिखाई दिए तो सड़क सुरक्षा माह में निकाली गई रैली में ही कुछ अधिकारियों ने सीट बेल्ट लगानी जरूरी नही समझी। ऐसी मानसिकता को बदलना जरूरी है जो कि सिर्फ़ जागरूकता से नही कड़ी कार्यवाही से ही सम्भव है। विश्व के कुछ देशों में वहां की सरकार और प्रशासन जागरूक करने से ज्यादा कड़ी कार्यवाही में विश्वास रखती है जिसके परिणामस्वरूप वहाँ जनता के दिये टेक्स के पैसे का इस्तेमाल अन्य जनहित कार्य मे किया जाता है।
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