हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के कुछ महानुभावों ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस पवित्र भूमि का मान सम्मान चरम पर पहुंचाया है। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि के होने के बावजूद भी उन्होंने अपने संबंधित विषय में विद्वता की पराकाष्ठा को छुआ है। अपनी विशेष कार्यशैली, योग्यता, कर्तव्य परायणता, ईमानदारी, निष्ठा, वैज्ञानिक सोच के आधार पर उन्होंने देश और दुनिया में अपने कौशल का लोहा मनवाया है। अपने करियर के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने पर भी उन्होंने अपना मूल स्थान तथा जड़ों से जुड़े रहने में ही अपनी खुशी समझी है। आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के सबसे योग्य कुलपति डॉ पी०पी ध्यानी जोकि 1 दिसंबर 2019 से देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय बादशाहीथौल टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह गुरु राम राय विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति और जी०बी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक भी रह चुके हैं, जो कि भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है। डॉक्टर ध्यानी इंस्टिट्यूट ऑफ इकोलॉजी इंडियन अकैडमी आफ एनवायरमेंटल साइंस और इंडियन बोटैनिकल सोसायटी के फेलो हैं। उनके पास शिक्षण अनुसंधान और प्रशासन में 39 वर्षों का समृद्ध अनुभव है, और उनकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता इकोफिजियोलॉजी रेस्टोरेशन इकोलॉजी और संरक्षण जीव विज्ञान के क्षेत्र में है। डॉक्टर ध्यानी के 305 वैज्ञानिक प्रकाशन है जिनमें 190 शोध पत्र 23 पुस्तकें और पांच पॉलिसी डॉक्यूमेंट उनके द्वारा कृत हैं। उन्होंने 20 देशों का दौरा किया जिसमें दुनिया के सभी 6 मानवतावाद महाद्वीप शामिल है। उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों में 311 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों संगोष्ठी यू कार्यशाला ओं तथा बैठकों में प्रतिभाग किया है। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ ध्यानी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2009 में इंटरनेशनल बायोग्राफिकल सेंटर यूनाइटेड किंगडम द्वारा लीडिंग साइंटिस्ट ऑफ वर्ल्ड, साइंटिस्ट ऑफ द वर्ल्ड गौरव से सम्मानित किया गया। राम उसी को फ्रेंडशिप फॉर्म ऑफ इंडिया नई दिल्ली द्वारा भारत एक्सीलेंसी अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2010 में उन्हें भारतीय विज्ञान अकादमी हरिद्वार उत्तराखंड द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया विराम वर्ष 2012 में डॉक्टर ध्यानी को अमेरिकी जीवनी संस्थान उत्तरी कैरोलिना अमेरिका द्वारा गोल्ड मेडल फॉर इंडिया और अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया। वर्ष 2013 में डॉक्टर ध्यानी को प्रतिष्ठित इंडियन साइंस कांग्रेस के 101 में सत्र के पर्यावरण विज्ञान अनुभाग के  अनुभाग्य अध्यक्ष के रूप में चुना गया। उन्हें 2015 में 38 में इंडियन सोशल साइंस कांग्रेस की इकोलॉजिकल और पर्यावरण विज्ञान अनुसंधान समिति के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया। वर्ष 2016 में डॉ ध्यानी ने भारत सरकार की ओर से मोरक्को में यूएनएफ सीसीसी कॉप दो और मेक्सिको में यूएन सीबीडी 3 हिमालय पर सफलतापूर्वक साइड इवेंट आयोजित किया। उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक और प्रशासनिक नेतृत्व को देखते हुए भारत सरकार ने जीबी पंत इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन एनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट को वर्ष 2016 में एक राष्ट्रीय संस्थान का दर्जा दिया। मई 2019 में डॉक्टर ध्यानी को विज्ञान और समाज के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारतीय बौद्धिक मंच द्वारा उत्तराखंड रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने मजबूत शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व के आधार पर उन्होंने श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति के रूप में विश्वविद्यालय को हिमालयन यूनिवर्सिटी कंसोर्सियम के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की जो 62 से अधिक शेर श्रेणी के विश्वविद्यालयों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है। उन्होंने गुरु राम राय विश्वविद्यालय को स्थापना के 2 वर्षों के भीतर ही यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन की मान्यता दिलाई। हाल ही में सितंबर 2019 में उन्हें उत्तराखंड राज्य विधि आयोग, उत्तराखंड मानवाधिकार संरक्षण केंद्र और दिव्य हिमगिरी फाउंडेशन उत्तराखंड द्वारा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वाइस चांसलर ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डॉक्टर ध्यानी 26 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साइंटिफिक सोसाइटीज के लाइफ मेंबर हैं। उनका नाम कई वैश्विक दस्तावेजों में सूचीबद्ध है जिनमें 36 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बायोग्राफिकल डायरेक्टरीज है।

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